भारत के चतुरंग से दुनिया के शतरंज तक, जानिए 1500 साल पुराने खेल की कहानी

हर साल 20 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस (International Chess Day) मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर में शतरंज के इतिहास, इसके महत्व और खिलाड़ियों के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। इस मौके पर जानते हैं उस खेल की कहानी, जिसकी शुरुआत भारत से हुई थी।
शतरंज की शुरुआत भारत से
आज पूरी दुनिया में मशहूर शतरंज की जड़ें प्राचीन भारत से जुड़ी मानी जाती हैं। करीब 6वीं शताब्दी में भारत में “चतुरंग” नाम का खेल खेला जाता था। यही खेल समय के साथ बदलकर आधुनिक शतरंज बना।
चतुरंग में छिपी थी युद्ध की रणनीति
चतुरंग सिर्फ मनोरंजन का खेल नहीं था, बल्कि प्राचीन भारतीय युद्ध रणनीति का प्रतीक था। इसमें सेना की चार प्रमुख इकाइयों—पैदल सैनिक, घोड़े, हाथी और रथ—को दर्शाया गया था। आगे चलकर यही शतरंज के प्यादे, घोड़े, ऊंट और हाथी जैसे मोहरों में बदल गए।
भारत से फारस और फिर दुनिया तक
भारत से यह खेल फारस (आज का ईरान) पहुंचा, जहां इसे “शतरंज” कहा जाने लगा। इसके बाद यह अरब देशों और फिर यूरोप पहुंचा, जहां इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।
यूरोप ने बदला खेल का रूप
मध्यकाल में यूरोप में शतरंज के नियमों में कई बदलाव किए गए। रानी (Queen) को सबसे ताकतवर मोहरा बनाया गया और खेल को पहले से ज्यादा तेज, चुनौतीपूर्ण और रणनीतिक रूप दिया गया।
दुनिया का सबसे लोकप्रिय बोर्ड गेम
आज शतरंज 190 से अधिक देशों में खेला जाता है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि याददाश्त, एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और रणनीतिक सोच को बेहतर बनाने वाला खेल भी माना जाता है।
भारत ने दिए विश्व विजेता
भारत ने शतरंज को जन्म देने के साथ-साथ दुनिया को कई महान खिलाड़ी भी दिए। विश्वनाथन आनंद ने कई बार विश्व चैंपियन बनकर भारत का नाम रोशन किया। वहीं डी. गुकेश, आर. प्रज्ञानानंदा, अर्जुन एरिगैसी और कोनेरू हम्पी जैसे युवा सितारों ने भारत को वैश्विक शतरंज की नई ताकत बना दिया है।
डिजिटल दौर में शतरंज की नई उड़ान
मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की वजह से शतरंज पहले से कहीं ज्यादा लोकप्रिय हो गया है। अब दुनिया के किसी भी कोने में बैठा खिलाड़ी कुछ ही सेकंड में दूसरे देश के खिलाड़ी के साथ मुकाबला कर सकता है।
भारत की विरासत, दुनिया का खेल
करीब 1500 साल पहले भारत में शुरू हुआ चतुरंग आज पूरी दुनिया के करोड़ों लोगों को जोड़ने वाला खेल बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की यह प्राचीन विरासत आज भी दुनिया को रणनीति, धैर्य और सोच की नई सीख दे रही है।





