संसद में हंगामा: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

नई दिल्ली, 9 फरवरी 2026 संसद का बजट सत्र लगातार विवादों में घिरता जा रहा है. अब विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस से जुड़े सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है.
विवाद तब शुरू हुआ जब लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक का अंश सदन में पढ़ना चाहते थे. लेकिन स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी. स्पीकर का तर्क था कि जो किताब अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है, उस पर सदन में चर्चा कैसे की जा सकती है.
दूसरी ओर, राहुल गांधी किताब के अंश को पढ़ने पर अड़े रहे. इस मुद्दे को लेकर लोकसभा में इतना हंगामा हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात तक नहीं रख सके.
राहुल गांधी ने स्पीकर को लिखा पत्र
इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर उन्हें सदन में बोलने से रोकने को संसदीय परंपरा का उल्लंघन बताया. कांग्रेस ने यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी साझा किया.
कांग्रेस ने अपने पोस्ट में कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा के एक अहम मुद्दे को उठाने के विपक्ष के नेता के अधिकार से वंचित किए जाने का विरोध किया है.
रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने पत्र में ओम बिरला से कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय आपने मुझे एक पत्रिका को सत्यापित करने का निर्देश दिया था, जिसका मैं जिक्र करना चाहता था. मैंने अपना भाषण फिर से शुरू करते हुए उस दस्तावेज को सत्यापित भी किया.
संसदीय परंपरा का हवाला
पत्र में आगे कहा गया कि लंबे समय से चली आ रही संसदीय परंपरा के अनुसार, जिसमें पिछले स्पीकरों के फैसले भी शामिल हैं, सदन में किसी दस्तावेज का जिक्र करने वाले सदस्य को उसे सत्यापित करना होता है और उसकी सामग्री की जिम्मेदारी लेनी होती है. एक बार जब यह शर्त पूरी हो जाती है, तो स्पीकर सदस्य को दस्तावेज से उद्धरण देने या उसका जिक्र करने की अनुमति देते हैं. इसके बाद जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है और चेयर की भूमिका समाप्त हो जाती है.
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने इस मामले में संसदीय परंपरा का पालन नहीं किया और विपक्ष के नेता को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने से रोका गया.





