कैनरा बैंक घोटाला: निजी फर्म के पार्टनर को 7 साल की सजा, ₹4 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

कैनरा बैंक से धोखाधड़ी कर ₹4 करोड़ का लोन लेने के मामले में एक निजी फर्म के पार्टनर को सात साल की सजा सुनाई गई है। यह फैसला बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनाया। सीबीआई ने यह मामला 24 सितंबर 2010 को दर्ज किया था। यह शिकायत कैनरा बैंक, बेंगलुरु के चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने दी थी। आरोप था कि आरोपियों ने फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेजों के जरिए करोड़ों का लोन हासिल किया।
जांच में सामने आया कि चेन्नई की कैनरा बैंक, किलपौक ब्रांच के उस समय के चीफ मैनेजर टी. राजेन्द्रन और बैंक वैल्यूअर के.एस. अशोक ने निजी कंपनियों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाते हुए ₹4 करोड़ का लोन पास किया था। दोनों निजी फर्मों — Afrina Steel Rolling Mills और Basheer & Co — को नज़ीर अहमद, उनकी पत्नी फातिमा रिज़वाना और अशिक अराफ़त मिलकर चलाते थे।
ट्रायल के दौरान राजेन्द्रन और अशोक की मौत हो गई, इसलिए उनके खिलाफ मामला खत्म कर दिया गया। बाकी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने फातिमा रिज़वाना को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया। दोनों निजी फर्मों पर ₹20-20 लाख का जुर्माना लगाया गया।
सजा और जुर्माना:
नज़ीर अहमद को सात साल की कड़ी कैद और ₹40 लाख जुर्माना।
अशिक अराफ़त को एक साल की कैद और ₹20,000 का जुर्माना।
कुल मिलाकर सभी दोषियों पर ₹80,20,000 का जुर्माना लगाया गया है।





