“इमरजेंसी” पर दर्शकों का फैसला: दमदार परफॉर्मेंस, लेकिन कहानी में कसर बाकी

17 जनवरी को रिलीज कंगना रनौत की फिल्म “इमरजेंसी” को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है। इंदिरा गांधी के विवादित राजनीतिक दौर पर आधारित यह फिल्म एक बड़े ऐतिहासिक विषय को पर्दे पर लाने का प्रयास करती है, लेकिन यह हर दर्शक की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई।
दर्शकों की राय: बेहतरीन परफॉर्मेंस, पर कहानी में दम नहीं
दर्शकों के अनुसार, कंगना रनौत ने इंदिरा गांधी का किरदार प्रभावी तरीके से निभाया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलीवरी और लुक्स ने 70 के दशक की इंदिरा गांधी की यादें ताजा कर दीं। लेकिन जहां तक कहानी की बात है, लोगों को यह अपेक्षाकृत उबाऊ और खींची हुई लगी।
“कंगना का अभिनय और लुक्स शानदार हैं, लेकिन फिल्म कहीं-कहीं डॉक्यूमेंट्री जैसी लगती है। रोमांच की कमी महसूस होती है।”
सिनेमेटोग्राफी और निर्देशन की तारीफ
दर्शकों ने फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर की जमकर तारीफ की। भारत के 70 के दशक को सटीक तरीके से पर्दे पर उतारा गया है। इसके अलावा, “सिंहासन खाली करो” जैसे गानों को फिल्म का हाइलाइट बताया जा रहा है।
दर्शकों ने यह भी कहा कि फिल्म का प्रोडक्शन शानदार है। हर सीन असली लगता है, लेकिन कहानी उतनी प्रभावशाली नहीं है।
सह–अभिनेताओं का प्रदर्शन: मिला–जुला असर
अनुपम खेर ने जयप्रकाश नारायण की भूमिका में सबको प्रभावित किया, जबकि विशाक नायर को संजय गांधी के किरदार के लिए सराहा गया। हालांकि, श्रेयस तलपड़े (अटल बिहारी वाजपेयी) और महिमा चौधरी (पुपुल जयकर) का अभिनय औसत बताया गया।
इस फिल्म को उन्हीं दर्शकों ने पसंद किया है जिनको इतिहास और राजनीति में रुचि है। लेकिन मनोरंजन या हल्के-फुल्के ड्रामा की उम्मीद रखने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म उबाऊ साबित हो रही है।
दर्शकों ने बताया कि जो लोग राजनीति में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह फिल्म एक जरूरी अनुभव है। लेकिन अगर आप सिर्फ एंटरटेनमेंट चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको थका सकती है।
फाइनल वर्डिक्ट
दर्शकों की समीक्षा से साफ है कि “इमरजेंसी” एक गंभीर और प्रभावशाली फिल्म है। फिल्म की परफॉर्मेंस और प्रोडक्शन तो मजबूत हैं, लेकिन इसकी धीमी कहानी और भावनात्मक गहराई की कमी इसे एक मास्टरपीस बनने से रोकती है।
इमरजेंसी ने अपनी रिलीज के पहले ही सस्पेंस और विवाद का माहौल तैयार कर दिया था। सेंसर बोर्ड से जद्दोजहद, कोर्ट के चक्कर, और विरोध प्रदर्शनों के बीच यह फिल्म आखिरकार रिलीज हुई, लेकिन इसके साथ ही यह विवादों के घेरे में आ गई। पंजाब में इस फिल्म के खिलाफ विरोध चरम पर है, जहां शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस पर बैन लगाने की मांग की है।
पंजाब में बवाल: SGPC का विरोध
SGPC ने साफ तौर पर ऐलान किया कि यदि पंजाब में फिल्म को दिखाया गया, तो सिनेमाघरों के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन होगा। अमृतसर के सिनेमाघरों के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन इसका असर साफ तौर पर दिखाई दिया, जब इमरजेंसी के पहले ही दिन पीवीआर सिनेमा के शो रद्द कर दिए गए। SGPC ने आरोप लगाया है कि फिल्म में सिख समुदाय को बदनाम किया गया है।





