आंध्र प्रदेश को मिली स्थायी राजधानी: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ‘अमरावती’ को मिला कानूनी दर्जा

आंध्र प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास में 7 अप्रैल, 2026 का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही अमरावती को औपचारिक रूप से राज्य की राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता मिल गई है।
एक लंबे सपने का साकार होना
अमरावती को राजधानी बनाने का सपना लंबे समय से अधर में लटका हुआ था। इस नए घटनाक्रम ने उन सभी कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर दिया है जो पिछले कई वर्षों से इस परियोजना की राह में बाधा बनी हुई थीं। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे “राज्य के लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति” बताया है।
प्रमुख बिंदु और राजनीतिक प्रतिक्रिया
1. कानूनी आधार: राष्ट्रपति की सहमति के बाद अब अमरावती के पास राजधानी के रूप में पूर्ण कानूनी सुरक्षा और संवैधानिक वैधता है।
2. पीएम मोदी का आभार: मुख्यमंत्री नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन के बिना इस कानून को धरातल पर उतारना संभव नहीं था।
3. ऐतिहासिक जीत: टीडीपी (TDP) और राज्य के अन्य नेताओं ने इसे आंध्र प्रदेश के आत्मसम्मान की “ऐतिहासिक जीत” करार दिया है।
विकास की नई उम्मीद
अमरावती को आधिकारिक दर्जा मिलने से अब बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास में तेजी आने की उम्मीद है। निवेश के नए अवसर खुलेंगे और प्रशासनिक कार्यों में स्थिरता आएगी। यह निर्णय न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि अमरावती को एक आधुनिक ‘ग्लोबल सिटी’ बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगा।





