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फैक्ट चेक: वृद्ध दंपति के अंतिम संस्कार की चार साल पुरानी तस्वीर को सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे के साथ किया गया वायरल

फैक्ट चेक: बुजुर्ग दंपति के अंतिम संस्कार की चार साल पुरानी तस्वीर को सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे के साथ किया गया वायरल

 

सोशल मीडिया पर एक बुजुर्ग दंपति के अंतिम संस्कार की एक तस्वीर वायरल हो रही है। तस्वीर में दंपति के पार्थिव शरीर को देखा जा सकता हैं। इस दुर्लभ तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि मृत बुजुर्ग दंपति लखनऊ में रहते थे, मृत पुरुष रेटायर्ड कर्नल थे, इन्होंने बेटों की अनदेखी के चलते खुद को गोली मार ली। पोस्ट में आगे यह भी दावा किया जा रहा है कि दंपति के बेटे उनकी अंतिम संस्कार में भी शरीक नहीं हुए।

फेसबुक पर वायरल तस्वीर को शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन के साथ लिखा गया है कि ,” पिता का समाज व पुत्रों के नाम पत्र .लखनऊ के एक उच्चवर्गीय बूढ़े पिता ने अपने पुत्रों के नाम एक चिट्ठी लिखकर खुद को गोली मार ली। चिट्टी क्यों लिखी और क्या लिखा। यह जानने से पहले संक्षेप में चिट्टी लिखने की पृष्ठभूमि जान लेना जरूरी है। पिता सेना में कर्नल के पद से रिटार्यड हुए । वे लखनऊ के एक पॉश कॉलोनी में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। उनके दो बेटे थे। जो सुदूर अमेरिका में रहते थे। यहां यह बताने की जरूरत नहीं है कि माता-पिता ने अपने लाड़लों को पालने में कोई कोर कसर नहीं रखी। बच्चे सफलता की सीढ़िंया चढते गए। पढ़-लिखकर इतने योग्य हो गए कि दुनिया की सबसे नामी-गिरामी कार्पोरेट कंपनी में उनको नौकरी मिल गई। संयोग से दोनों भाई एक ही देश में,लेकिन अलग-अलग अपने परिवार के साथ रहते थे। एक दिन अचानक पिता ने रूंआसे गले से बेटों को खबर दी। बेटे! तुम्हारी मां अब इस दुनिया में नहीं रही । पिता अपनी पत्नी की मिट्टी के साथ बेटों के आने का इंतजार करते रहे। एक दिन बाद छोटा बेटा आया, जिसका घर का नाम चिंटू था। पिता ने पूछा चिंटू! मुन्ना क्यों नहीं आया। मुन्ना यानी बड़ा बेटा।पिता ने कहा कि उसे फोन मिला, पहली उडान से आये। धर्मानुसार बडे बेटे का आना सोच वृद्व फौजी ने जिद सी पकड़ ली। छोटे बेटे के मुंह से एक सच निकल पड़ा। उसने पिता से कहा कि मुन्ना भईया ने कहा कि, “मां की मौत में तुम चले जाओ। पिता जी मरेंगे, तो मैं चला जाऊंगा।” कर्नल साहब (पिता) कमरे के अंदर गए। खुद को कई बार संभाला फिर उन्होंने चंद पंक्तियो का एक पत्र लिखा। जो इस प्रकार था-

प्रिय बेटो मैंने और तुम्हारी मां ने बहुत सारे अरमानों के साथ तुम लोगों को पाला-पोसा। दुनिया के सारे सुख दिए। देश-दुनिया के बेहतरीन जगहों पर शिक्षा दी। जब तुम्हारी मां अंतिम सांस ले रही थी, तो मैं उसके पास था।वह मरते समय तुम दोनों का चेहरा एक बार देखना चाहती थी और तुम दोनों को बाहों में भर कर चूमना चाहती थी। तुम लोग उसके लिए वही मासूम मुन्ना और चिंटू थे। उसकी मौत के बात उसकी लाश के पास तुम लोगों का इंतजार करने लिए मैं था। मेरा मन कर रहा था कि काश तुम लोग मुझे ढांढस बधाने के लिए मेरे पास होते। मेरी मौत के बाद मेरी लाश के पास तुम लोगों का इंतजार करने के लिए कोई नहीं होगा। सबसे बड़ी बात यह कि मैं नहीं चाहता कि मेरी लाश निपटाने के लिए तुम्हारे बड़े भाई को आना पड़े। इसलिए सबसे अच्छा यह है कि अपनी मां के साथ मुझे भी निपटाकर ही जाओ। मुझे जीने का कोई हक नहीं क्योंकि जिस समाज ने मुझे जीवन भर धन के साथ सम्मान भी दिया, मैंने समाज को असभ्य नागरिक दिये। हाँ अच्छा रहा कि हम अमरीका जाकर नहीं बसे, सच्चाई दब जाती।

मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरे मैडल तथा फोटो बटालियन को लौटाए जाए तथा घर का पैसा नौकरों में बाटा जाऐ। जमापूँजी आधी वृद्ध सेवा केन्द्र में तथा आधी सैनिक कल्याण में दी जाऐ।
तुम्हारा पिता
कमरे से ठांय की आवाज आई। कर्नल साहब ने खुद को गोली मार ली। यह क्यों हुआ, किस कारण हुआ? कोई दोषी है या नहीं। मुझे इसके बारे में कुछ नहीं कहना। हाँ यह काल्पनिक कहानी नहीं। पूरी तरह सत्य घटना है। ” 

 

फेसबुक का लिंक यहाँ देखें।

 

फैक्ट चेक: 

फेसबुक पर वायरल हो रही तस्वीर को साथ शेयर किए गए दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने पड़ताल की। पड़ताल के दौरान हमने सबसे पहले इस बात का पता लगाने के लिए खोजा कि लखनऊ में ऐसी कोई घटना कब घटी है। इसके लिए हमने सबसे पहले कुछ संबंधित कीवर्ड्स की मदद से गूगल पर खोजना शुरू किया। प्राप्त परिणामों से हमने जाना कि आठ साल पहले लखनऊ के गोमती नगर इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर ने खुद को गोली मार ली थी। प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक यह खबर आठ साल पहले की है। इसके साथ ही लेख में कहीं भी पत्नी के मृत्यु का जिक्र नहीं किया गया है।

इसलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए हमने अब वायरल तस्वीर को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च टूल के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल तस्वीर Rahul Sharma नामक एक फेसबुक यूज़र द्वारा सितंबर 03,2018 को किया एक पोस्ट मिला।

 

 

प्राप्त पोस्ट से हमने जाना कि वायरल तस्वीर कई साल पहले से ही इंटरनेट पर मौजूद है। पोस्ट में बताया गया है कि तस्वीर में मृत दिख रहे व्यक्ति मध्यप्रदेश के पोरसा के पंडित थे। इस जानकारी के आधार पर हमने गूगल पर और बारीकी से खोजना शुरू किया। इसके बाद हमें अमर उजाला की वेबसाइट पर छपा एक लेख मिला। जहां साल 2018 पोरसा कस्बे में हुई एक वृद्ध दंपति की मृत्यु की जानकारी दी गयी है। रिपोर्ट के मुताबिक चार साल पहले पोरसा कस्बे में रहने वाले छोटेलाल शर्मा (90) व उनकी पत्नी गंगादेवी (87) की मृत्यु हुई थी।

 

 

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमें पता चला कि वायरल तस्वीर हालिया दिनों की नहीं बल्कि चार साल पुरानी। सोशल मीडिया पर वायरल इस तस्वीर को इन दिनों भ्रम फ़ैलाने के लिए वायरल किया जा रहा है। इसके साथ ही वायरल पोस्ट में जिस तरह की घटना का जिक्र कर यह दावा किया जा रहा है कि ‘लखनऊ में बेटों की बेरुखी से दंपति ने आत्महत्या कर ली’ वह खबर असल में आठ साल पुरानी है।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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