अब राज्यों को मिल गया OBC लिस्ट बनाने का अधिकार, राष्ट्रपति कोविंद ने बिल पर हस्ताक्षर कर दी हरी झंडी
ओबीसी संशोधन बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार यानी बीते दिन हरी झंडी दे दी है। उनके हस्ताक्षर के बाद अब यह बिल कानून की शक्ल ले चुका है। बता दे मॉनसून सत्र के आखिरी समय में ओबीसी संशोधन बिल को पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा से पारित करवाया गया था और इस बिल को पक्ष और विपक्ष, दोनों ने समर्थन दिया था। इधर इस बिल के कानून बनने के बाद अब राज्य खुद से ओबीसी लिस्ट बना सकेंगे।
जाने किस सदन में कितने मिले थे वोट।
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में मौजूद सभी 186 सांसदों ने इस बिल का समर्थन किया। राज्यसभा में जहां इस बिल के पक्ष में 186 वोट पड़े थे, वहीं लोकसभा में 385 वोट पड़े थे। अब कानून बन जाने के बाद इसके तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने स्तर पर ओबीसी आरक्षण के लिए जातियों की सूची तय करने और उन्हें कोटा देने का अधिकार होगा।
बिल पेश करने के दौरान क्या कहा था सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने ?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश करते हुए कहा था कि संविधान (127 वां संशोधन) विधेयक, 2021 एक ऐतिहासिक कानून है, क्योंकि इससे देश की 671 जातियों को लाभ होगा. उन्होंने कहा था कि यह संविधान संशोधन राज्यों को ओबीसी सूची तैयार करने का अधिकार देने के लिए लाया गया है। मंत्री ने कहा कि विधेयक को 105वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में माना जाना चाहिए।
क्या कहा था पीएम ने ?
इधर संसद में ओबीसी बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि संविधान (127वां संशोधन) विधेयक, 2021 का दोनों सदनों में पास होना हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण क्षण है. यह विधेयक सामाजिक सशक्तीकरण को आगे बढ़ाता है। यह हाशिए पर पड़े वर्गों को सम्मान, अवसर और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
अब जानें क्या है ओबीसी आरक्षण कानून ?
ओबीसी आरक्षण बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बने इस कानून में अब राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को अन्य पिछड़ा वर्ग की लिस्ट तैयार करने का अधिकार मिला है। यानी हर राज्य अब पिछड़े वर्गों की सूची बना सकता है और उसे बनाए रख सकता है। पहले यह अधिकार राज्यों के पास नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के पास था।
सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को लेकर की थी अहम टिप्पणी।
दरअसल, मई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को लेकर अहम टिप्पणी की थी। आरक्षण पर पुर्नविचार से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई करने की मांग खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 102वें संविधान संशोधन के बाद ओबीसी की सूची बनाने का अधिकार राज्यों के पास नहीं, बल्कि केंद्र के पास है। इसके बाद केंद्र सरकार ने ओबीसी सूची तय करने का अधिकार राज्यों को देने के लिए 127वां संविधान संशोधन विधेयक लाने की पहल की।





