अन्ना हजारे ने छात्रों के समर्थन में किया मौन प्रदर्शन, PM मोदी को लिखे पत्र के बाद बोले- बातचीत से निकले समाधान

Anna Hazare News: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में छात्रों के समर्थन में दो घंटे का मौन प्रदर्शन (मौन आंदोलन) किया। इससे एक दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छात्र आंदोलन पर संवाद शुरू करने और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की थी।
अन्ना हजारे का यह कदम उस समय सामने आया है, जब NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों का आंदोलन जारी है।
अहिल्यानगर में दो घंटे का मौन आंदोलन
अन्ना हजारे ने सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अहिल्यानगर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मौन प्रदर्शन किया। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद वह अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए।
उनके सहयोगियों के अनुसार, यह मौन आंदोलन छात्रों की आवाज़ के समर्थन और शांतिपूर्ण समाधान की अपील के लिए आयोजित किया गया।
PM मोदी को लिखा था पत्र
बुधवार को अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मंत्री की जवाबदेही तय होती है और उससे इस्तीफा लिया जाता है, तो इससे सरकार कमजोर नहीं होगी बल्कि शासन व्यवस्था में जवाबदेही का संदेश जाएगा। हालांकि उन्होंने किसी मंत्री का नाम नहीं लिया।
पुलिस कार्रवाई पर भी जताई चिंता
अन्ना हजारे ने अपने पत्र में आंदोलनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों के आक्रोश को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसे समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह छात्रों से शांतिपूर्ण संवाद कर भरोसे का माहौल बनाए और बातचीत के जरिए समाधान निकाले।
बोले- जनता की बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाना जरूरी
मौन प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए जनता की चिंताओं को उनके सामने रखना जरूरी था। इसी उद्देश्य से उन्होंने उन्हें पत्र भेजा।
देशभर में जारी है छात्र आंदोलन
NEET पेपर लीक विवाद को लेकर विभिन्न राज्यों में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच कई राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक हस्तियों ने भी छात्रों के आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अन्ना हजारे का मौन प्रदर्शन भी इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद की दिशा में कोई ठोस पहल होती है या नहीं।





