आखिर क्यों सड़कों पर उतरे लाखों युवा? जानिए कैसे NEET पेपर लीक से शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन

नई दिल्ली: देशभर में इन दिनों युवाओं का आंदोलन चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर कई राज्यों तक हजारों छात्र और युवा सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन की शुरुआत 2026 के NEET पेपर लीक विवाद से हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। अब यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दों तक पहुंच चुका है।
NEET पेपर लीक से कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत 2026 की NEET (National Eligibility cum Entrance Test) परीक्षा में कथित पेपर लीक की खबरों से हुई। हर साल लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए यह परीक्षा देते हैं। पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और तैयारी पर इस विवाद ने सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
छात्र आंदोलन से देशव्यापी विरोध तक
शुरुआत में यह विरोध केवल छात्रों तक सीमित था। बाद में Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले यह अभियान तेजी से सोशल मीडिया पर फैलने लगा। देखते ही देखते यह विरोध कई शहरों तक पहुंच गया।
इसके बाद आंदोलन में केवल परीक्षा से जुड़े मुद्दे ही नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, रोजगार, भ्रष्टाचार और शासन व्यवस्था से जुड़े सवाल भी शामिल होने लगे।
सोनम वांगचुक के जुड़ने से बढ़ी चर्चा
आंदोलन को नई गति तब मिली जब पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस विरोध में शामिल हुए और अनशन शुरू किया। उनके समर्थन के बाद इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ध्यान मिलने लगा। दिल्ली का जंतर-मंतर प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बन गया, जहां लगातार छात्र और युवा जुटने लगे।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
मानसून सत्र के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की, आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। दोनों पक्षों के घायल होने की खबरें सामने आईं।
इन घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं, जिसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
सरकार और विपक्ष के अलग-अलग दावे
कई विपक्षी नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शामिल हैं, ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। विपक्ष ने सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने का आरोप लगाया।
वहीं सरकार का कहना है कि NEET पेपर लीक मामले में कार्रवाई की जा रही है और जांच जारी है। सरकार का दावा है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जबकि प्रदर्शनकारी मानते हैं कि अब तक उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं।
क्या है इस आंदोलन का महत्व?
एक परीक्षा विवाद से शुरू हुआ यह विरोध अब पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले बड़े युवा आंदोलन का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत तथा जांच के नतीजे इस आंदोलन की दिशा तय कर सकते हैं।






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