
मुंबई में भीषण गर्मी और उमस के चलते बिजली की मांग ने अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सोमवार को शहर में बिजली की अधिकतम मांग (peak power demand) 4,608 मेगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर (all-time high) पर पहुंच गई। चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए घरों और कार्यालयों में एयर-कंडीशनर (AC) और पंखों का इस्तेमाल अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे बिजली के नेटवर्क पर भारी दबाव पड़ा है।
मांग और आपूर्ति का अंतर
मुंबई में बढ़ती इस मांग को पूरा करने के लिए बिजली कंपनियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। टाटा पावर और अदाणी इलेक्ट्रिसिटी जैसी प्रमुख उपयोगिता कंपनियों ने मांग और स्थानीय उत्पादन के बीच के अंतर को पाटने के लिए 3,700 मेगावाट से अधिक बिजली बाहरी स्रोतों से खरीदी है। इसमें बाहर से मंगाई गई ग्रीन एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) भी शामिल है।
शहर के स्थानीय बिजली उत्पादन की बात करें तो, कुल 868 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन स्थानीय स्तर पर हो पाया। इसमें टाटा पावर ने 574 मेगावाट और अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने 294 मेगावाट का योगदान दिया।
बढ़ती खपत के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली की इस रिकॉर्ड खपत के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
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भीषण गर्मी और उमस: तापमान और ह्यूमिडिटी बढ़ने के कारण एसी और कूलिंग उपकरणों का निरंतर उपयोग।
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बढ़ता लोड: शहर में नए डेटा सेंटरों का निर्माण और बिजली का बुनियादी ढांचा, जो लगातार अतिरिक्त लोड जोड़ रहे हैं।
फिलहाल, बिजली कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और कोशिश कर रही हैं कि शहर की बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से काम करती रहे। आने वाले दिनों में यदि तापमान इसी तरह बना रहा, तो बिजली की मांग और भी बढ़ने की संभावना है।





