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मेगा राफेल डील से मजबूत होगी भारतीय वायुसेना, जानिए क्यों है यह खास

भारत अपनी वायु शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के चार दिवसीय फ्रांस दौरे के बीच 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने फ्रांस को 114 राफेल विमानों की खरीद के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है। फ्रांस की ओर से अगले दो से तीन महीनों में कीमत, निर्माण समयसीमा और लॉजिस्टिक सहायता से जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है और अगले एक वर्ष के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

यह खरीद भारतीय वायुसेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी को दूर करने की योजना का हिस्सा है। वायुसेना को 42 स्क्वाड्रनों की आवश्यकता है, लेकिन फिलहाल उसके पास केवल 29 स्क्वाड्रन ही हैं। पुराने मिग-21 विमानों की सेवानिवृत्ति के बाद यह कमी और बढ़ गई है।

फ्रांस दौरे के दौरान एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की मुलाकात प्रमुख फ्रांसीसी रक्षा कंपनियों डसॉल्ट एविएशन और एमबीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों से होने की संभावना है। बातचीत में राफेल विमानों की खरीद के अलावा तकनीकी सहयोग, रक्षा साझेदारी और भारतीय हथियार प्रणालियों को भविष्य के विमानों में शामिल करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस महीने फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। यदि यह दौरा होता है तो राफेल सौदा और रक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय बन सकते हैं।

इस प्रस्तावित सौदे की सबसे खास बात यह है कि 114 में से लगभग 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जा सकता है, जबकि बाकी विमान सीधे फ्रांस से आएंगे। इसके लिए डसॉल्ट एविएशन किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी कर सकती है।

रक्षा मंत्रालय इस परियोजना में करीब 50 प्रतिशत स्थानीयकरण का लक्ष्य रख रहा है। इसका मतलब है कि विमानों में भारतीय तकनीक, उपकरण और हथियारों का अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। यह सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को भी मजबूती देगा।

भारत और फ्रांस के बीच राफेल विमानों की साझेदारी 2016 में शुरू हुई थी, जब 36 राफेल विमानों की खरीद का समझौता हुआ था। सभी 36 विमान भारतीय वायुसेना को मिल चुके हैं और वर्तमान में अंबाला और हासीमारा एयरबेस पर तैनात हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से मौजूद राफेल इंफ्रास्ट्रक्चर, रखरखाव व्यवस्था और प्रशिक्षित कर्मियों की वजह से नए विमानों को शामिल करना आसान होगा।

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल विमान हैं। इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-एम विमानों का सौदा भी हो चुका है। यदि 114 नए राफेल विमानों की खरीद पूरी हो जाती है तो भारत के पास कुल 176 राफेल विमान हो जाएंगे, जिससे चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर देश की हवाई ताकत और सुरक्षा तैयारियां काफी मजबूत होंगी।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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