हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ से डिजिटल युग तक

30 मई 2026 को हिंदी पत्रकारिता ने अपने 200 वर्ष पूरे किए। यह दिन हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 1826 में पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ से मानी जाती है। यह केवल समाचार नहीं, बल्कि जनजागरण, स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम बना।
उदन्त-मार्त्तण्ड
30 मई 1826 को पंडित युगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ (अर्थ—उगता सूर्य) प्रकाशित किया, जो हिंदी का पहला समाचार पत्र था। सीमित संसाधनों के बावजूद यह एक साहसिक शुरुआत थी। इसका प्रकाशन 4 दिसंबर 1826 को बंद हो गया।
बनारस अखबार
लंबे समय तक ‘बनारस अखबार’ (1845) को पहला हिंदी पत्र माना गया, लेकिन ब्रजेन्द्र नाथ बंधोपाध्याय ने राजा राधाकांत देव के पुस्तकालय में ‘उदन्त-मार्त्तण्ड’ खोजा। इसे 1931 में बनारसी दास चतुर्वेदी ने ‘विशाल भारत’ में प्रकाशित किया।
मालवा अखबार
1878 के वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट में लॉर्ड लिटन ने ‘मालवा अखबार’ का उल्लेख करते हुए क्षेत्रीय पत्रकारिता के प्रभाव को स्वीकार किया।
इंदौर में 6 मार्च 1849 को धर्मनारायण द्वारा ‘मालवा अखबार’ शुरू हुआ। यह हिंदी-उर्दू में प्रकाशित होता था और इसकी प्रसार संख्या 108 से 105 प्रतियों तक रही। 1853 में प्रेमनारायण इसके संपादक बने। समाचार कथात्मक शैली में राजा-महाराजाओं पर केंद्रित होते थे।
इंदौर में आगे 1852 ‘दिल्ली-ए-अखबार’, 1861 ‘पूर्ण चंद्रोदय’, 1863 ‘वृत लहरी’ और 1873 ‘इंदौर स्टेट गजट’ प्रकाशित हुए, जिससे इंदौर पत्रकारिता की राजधानी बना। दो शताब्दियों में हिंदी पत्रकारिता प्रिंट से डिजिटल मीडिया तक पहुंची और समाज व लोकतंत्र की मजबूत आवाज बनी।





