US-Iran 60 Day Peace Plan: होर्मुज़ जलडमरूमध्य से लेकर तेल बिक्री तक, प्रस्तावित समझौते में क्या-क्या शामिल?

US-Iran 60 Day Peace Plan: अमेरिका और ईरान के बीच कई सप्ताह से चल रही बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच एक संभावित 60 दिन के शांति समझौते को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रस्तावित समझौता युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ महीनों से क्षेत्रीय तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल आपूर्ति प्रभावित रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि समझौते का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है, हालांकि अंतिम शर्तों पर अभी बातचीत जारी है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर जोर
प्रस्तावित समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना बताया जा रहा है।
यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्ताव में तय अवधि के दौरान इस मार्ग को बिना अतिरिक्त शुल्क के खोलने और समुद्री गतिविधियों को सामान्य बनाने पर सहमति बनने की चर्चा है।
हालांकि, ईरानी मीडिया ने अमेरिकी दावों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि इस क्षेत्र पर नियंत्रण और अधिकार को लेकर ईरान का रुख अलग बना हुआ है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्या चर्चा?
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित योजना में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर भी बातचीत शामिल है।
बताया जा रहा है कि ईरान उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के मुद्दे पर कुछ प्रतिबद्धताएं दे सकता है, जबकि इस प्रक्रिया के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर आगे के दौर में चर्चा होने की संभावना है।
हालांकि अभी तक किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
तीन चरणों में आगे बढ़ सकती है शांति प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, संभावित शांति प्रक्रिया को तीन चरणों में आगे बढ़ाने की रूपरेखा पर विचार किया गया है।
पहले चरण में क्षेत्रीय संघर्ष को औपचारिक रूप से समाप्त करने की कोशिश होगी।
दूसरे चरण में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े विवाद और समुद्री गतिविधियों को सामान्य करने पर काम किया जाएगा।
तीसरे चरण में व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा समझौते के लिए बातचीत का नया दौर शुरू किया जा सकता है।
ईरानी तेल बिक्री और प्रतिबंधों पर बातचीत
समझौते के तहत ईरान की ओर से तेल निर्यात और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर भी मांगें सामने आई हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान चाहता है कि उसके तेल निर्यात पर लगी बाधाओं में राहत मिले और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जाए।
इसके बदले अमेरिका की ओर से क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही जा रही है।
विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों पर भी चर्चा
बातचीत में ईरान की विदेशों में मौजूद वित्तीय संपत्तियों को लेकर भी मुद्दा उठाया गया है।
हालांकि रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी पक्ष का कहना है कि किसी भी वित्तीय राहत से पहले ठोस और सत्यापित कदम जरूरी होंगे।
लेबनान में संघर्ष समाप्त करने की भी चर्चा
प्रस्तावित योजना में लेबनान में जारी तनाव को कम करने का मुद्दा भी शामिल बताया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते के तहत क्षेत्रीय स्तर पर हिंसा कम करने और भविष्य में संघर्ष रोकने के लिए अलग व्यवस्था पर चर्चा की जा रही है।
इसी बीच इजराइल की सुरक्षा चिंताओं को लेकर भी अलग स्तर पर बातचीत जारी रहने की जानकारी सामने आई है।
ईरान का क्या कहना है?
ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अब भी कई महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं।
ईरान का कहना है कि किसी औपचारिक समझौते तक पहुंचने से पहले कई बड़े मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन यह प्रस्ताव पश्चिम एशिया में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अहम माना जा रहा है।





