INR अब तक के सबसे निचले स्तर पर: डॉलर के मुकाबले 95.74 के पार

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौतीपूर्ण खबर सामने आई है। बुधवार, 13 मई 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले INR 95.74 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (all-time low) पर गिर गया है। मंगलवार को यह 95.7375 पर था, जिससे अब यह 0.1% और कमजोर हो गया है।
गिरावट के मुख्य कारण
रुपये में इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
• कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। 28 फरवरी से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 50% तक बढ़ चुकी हैं, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा है।
• विदेशी कर्ज का भुगतान: विदेशी कर्ज की अदायगी और आयातकों द्वारा हेजिंग की मांग ने मुद्रा पर दबाव और बढ़ा दिया है।
• भू-राजनीतिक तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
सरकार और RBI के कदम
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर हस्तक्षेप न करता, तो रुपये की स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। स्थिति को संभालने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के उपायों पर जोर दिया है।
• सरकार ने कीमती धातुओं पर आयात शुल्क (import duties) बढ़ा दिया है ताकि मांग को नियंत्रित किया जा सके।
• RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, यदि मुद्रास्फीति का दबाव बना रहता है, तो भविष्य में नीतिगत दरों में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती या विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह (portfolio flows) फिर से शुरू नहीं होता, तब तक रुपये में सुधार की संभावना कम है।





