
कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के माध्यम को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) ने राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम को ‘जबरन’ लागू करने के कथित फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
कलगी और होसपेटे में विरोध प्रदर्शन
AIDSO और सार्वजनिक शिक्षा संरक्षण समिति के सदस्यों ने 23 अप्रैल को कलबुर्गी और होसपेटे में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि सरकार की ‘द्विभाषी नीति’ (Bilingual Policy) के नाम पर कन्नड़ माध्यम के साथ भेदभाव किया जा रहा है। कलबुर्गी में प्रदर्शनकारी SVP सर्कल पर इकट्ठा हुए और कक्षा 1 से हजारों स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम शुरू करने के सरकार के कदम की तीखी आलोचना की।
कन्नड़ माध्यम बंद होने का डर
AIDSO के जिला अध्यक्ष तुलजाराम एन.के. ने दावा किया कि कई स्कूलों में अभिभावकों को सूचित किया जा रहा है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से कन्नड़ माध्यम को बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा छात्रों के मौलिक अधिकार का हिस्सा है और इसे बंद करना स्थानीय संस्कृति और बच्चों के विकास के खिलाफ है।
छात्रों और अभिभावकों की मांग
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार को सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार करना चाहिए, न कि कन्नड़ माध्यम की बलि देकर अंग्रेजी को अनिवार्य बनाना चाहिए। AIDSO का कहना है कि वे मातृभाषा आधारित शिक्षा की रक्षा के लिए अपना आंदोलन और तेज करेंगे।





