भारत-रूस का बड़ा रक्षा समझौता: अब साझा होंगे सैन्य ठिकाने, 3000 सैनिक तक तैनात करने की अनुमति

New Delhi: भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों के बीच हुआ RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Agreement) अब पूरी तरह लागू हो गया है, जिससे दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, बंदरगाहों और एयरबेस का इस्तेमाल कर सकेंगे।
क्या है RELOS समझौता?
RELOS एक ऐसा लॉजिस्टिक समझौता है, जिसके तहत भारत और Russia एक-दूसरे को सैन्य सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। इसमें ईंधन, मरम्मत, स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी सपोर्ट शामिल है। यह समझौता शांति और युद्ध—दोनों समय में लागू रहेगा।
3,000 सैनिक और 5 जहाज तैनात करने की अनुमति
इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर 3,000 तक सैनिक तैनात कर सकते हैं। साथ ही 5 युद्धपोत और 10 फाइटर जेट तक की तैनाती की भी अनुमति होगी। यह समझौता 5 साल के लिए लागू रहेगा और जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
रणनीतिक पहुंच होगी मजबूत
इस समझौते से भारत की पहुंच आर्कटिक क्षेत्र तक बढ़ेगी, जहां रूस के बड़े पोर्ट जैसे Murmansk और Severomorsk मौजूद हैं। वहीं रूस को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत से लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलेगा।
LEMOA से कैसे अलग है RELOS?
भारत पहले ही United States के साथ LEMOA समझौता कर चुका है, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन RELOS इससे अलग है, क्योंकि इसमें सैनिकों की तैनाती और वस्तुओं के आदान-प्रदान (बार्टर सिस्टम) की भी अनुमति है।
मल्टी-अलाइनमेंट नीति का हिस्सा
RELOS और LEMOA जैसे समझौते भारत की “मल्टी-अलाइनमेंट” नीति को दिखाते हैं, जिसमें भारत अलग-अलग वैश्विक ताकतों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखता है।
भारत-रूस के बीच यह समझौता न केवल सैन्य सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा। आने वाले समय में इसका असर इंडो-पैसिफिक और आर्कटिक दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।





