
भारत ने एक बार फिर अपनी ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbor First) नीति और मानवीय मूल्यों का परिचय देते हुए संकट में फंसे अफगानिस्तान की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। हाल ही में अफगानिस्तान में आए विनाशकारी बाढ़ और भूकंप के कारण उत्पन्न हुई मानवीय त्रासदी को देखते हुए, भारत सरकार ने 5 अप्रैल 2026 को राहत सामग्री की एक नई खेप रवाना की है।
मानवीय सहायता की नई खेप
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत इस चुनौतीपूर्ण समय में अफगान लोगों को निरंतर मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राहत सामग्री की इस खेप में शामिल हैं:
1. आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं
2. खाद्य सामग्री और राशन
3. टेंट और कंबल (बेघर हुए लोगों के लिए)
4. चिकित्सा उपकरण
अफगानिस्तान में प्राकृतिक आपदा का कहर
अफगानिस्तान वर्तमान में दोहरी मार झेल रहा है। भारी बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने हजारों घरों को तबाह कर दिया है, वहीं भूकंप के झटकों ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से मदद की गुहार लगाई गई थी, जिस पर भारत ने त्वरित प्रतिक्रिया दी है।
भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने अफगानिस्तान की मदद की है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने लाखों टन गेहूं, कोविड-19 टीके और अन्य जरूरी वस्तुएं अफगानिस्तान भेजी हैं। भारत का मानना है कि वहां की जनता के साथ हमारे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध अटूट हैं, और संकट के समय उनकी सहायता करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
भारत द्वारा भेजी गई यह आपातकालीन राहत सामग्री अफगानिस्तान के प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है। यह कदम न केवल दोनों देशों के मानवीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की एक जिम्मेदार राष्ट्र की छवि को भी दर्शाता है।





