मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब इंटरनेट पर भी? समुद्री केबल्स को लेकर बढ़ी चिंता

अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव अब तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है। इस संघर्ष के कारण सिर्फ तेल और गैस सप्लाई ही नहीं, बल्कि दुनिया के डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खाड़ी (Gulf) और रेड सी (Red Sea) इलाके में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर कई देशों में संचार, बैंकिंग सिस्टम और डेटा सेवाओं पर पड़ सकता है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर असर
संघर्ष के चलते हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पहले ही काफी प्रभावित हो चुका है। यहां जहाजों की आवाजाही कम हो गई है और राहत एजेंसियों का कहना है कि जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है।
यह इलाका दुनिया में तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, और अब इसके पास मौजूद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
रेड सी और बाब-अल-मंदेब पर नजर
विशेषज्ञ बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb) और रेड सी पर भी नजर बनाए हुए हैं। यहां समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ती हैं।
अगर इन इलाकों में एक साथ कोई रुकावट आती है, तो दुनिया भर में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।
मरम्मत करना भी मुश्किल
इस समय सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर केबल्स को नुकसान होता है, तो उन्हें ठीक करना आसान नहीं होगा।
जारी सैन्य गतिविधियों और समुद्री खतरे के कारण मरम्मत करने वाले जहाज वहां तक सुरक्षित तरीके से नहीं पहुंच पाएंगे। ऐसे में अगर कोई नुकसान होता है, तो उसे ठीक करने में लंबा समय लग सकता है।
पहले भी दिख चुका है असर
पहले भी रेड सी में केबल्स को नुकसान पहुंचने पर एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हुई थीं।
अब जब दोनों अहम समुद्री रास्तों पर दबाव बढ़ रहा है, तो डर है कि यह संकट ऊर्जा बाजार से निकलकर डिजिटल दुनिया तक भी फैल सकता है।
अभी स्थिति नियंत्रण में, लेकिन खतरा बरकरार
फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में इंटरनेट केबल्स को बड़े स्तर पर नुकसान की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
लेकिन हॉर्मुज़ में रुकावट, जहाजों पर खतरा और बढ़ता तनाव यह संकेत दे रहा है कि दुनिया के डिजिटल नेटवर्क भी अब इस संकट की चपेट में आ सकते हैं।





