हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ा, अमेरिका ने ईरान पर ‘बंकर बस्टर’ से किया हमला

US-Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz को फिर से खोलने के उद्देश्य से अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों पर बड़ा सैन्य हमला किया है।
क्या है पूरा मामला?
United States Central Command के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में मौजूद मजबूत (हॉर्डन) मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में 5,000 पाउंड वज़न वाले डीप-पेनेट्रेशन बम, जिन्हें आमतौर पर “बंकर बस्टर” कहा जाता है, का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन ठिकानों से एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें तैनात थीं, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए बड़ा खतरा बन रही थीं।
Hours ago, U.S. forces successfully employed multiple 5,000-pound deep penetrator munitions on hardened Iranian missile sites along Iran’s coastline near the Strait of Hormuz. The Iranian anti-ship cruise missiles in these sites posed a risk to international shipping in the… pic.twitter.com/hgCSFH0cqO
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 17, 2026
क्यों अहम है हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है।
ईरान द्वारा इस रास्ते को ब्लॉक करने के बाद:
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वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई
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ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया
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अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी
अमेरिका के साथ कौन खड़ा है?
इस कार्रवाई के बीच अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित समर्थन मिला है। कई सहयोगी देशों, यहां तक कि NATO के सदस्य भी, इस ऑपरेशन में सीधे शामिल होने से पीछे हट गए हैं।
Donald Trump का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों के रुख पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों को कम से कम समुद्री सुरक्षा के लिए मदद करनी चाहिए थी। ट्रंप के मुताबिक, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना वैश्विक हित में है।
ईरान का क्या कहना है?
ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण उद्देश्यों, जैसे ऊर्जा उत्पादन, के लिए है। वह किसी भी तरह के परमाणु हथियार विकसित करने से इनकार करता है।
‘बंकर बस्टर’ बम कितने खतरनाक?
“बंकर बस्टर” बम खासतौर पर मजबूत और जमीन के नीचे बने ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि, इस बार इस्तेमाल किए गए 5,000 पाउंड के बम, पिछले साल ईरानी परमाणु ठिकानों पर इस्तेमाल किए गए 30,000 पाउंड के बमों से कम शक्तिशाली बताए जा रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह टकराव और बढ़ता है या कूटनीतिक रास्ता निकलता है।





