ट्रंप ने ब्रिटेन की सैन्य मदद ठुकराई, बेस एक्सेस पर विवाद के बाद बढ़ा तनाव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन को स्पष्ट कर दिया है कि ईरान संघर्ष में उसकी सैन्य सहायता अब आवश्यक नहीं है। यह ऐलान दोनों देशों के ऐतिहासिक “स्पेशल रिलेशनशिप” में बढ़ते तनाव का संकेत है।
संघर्ष तब बढ़ा जब खबरें आईं कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिका को ब्रिटिश एयरबेस के पूर्ण उपयोग की अनुमति देने में हिचकिचाहट दिखाई। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स, जिसमें HMS प्रिंस ऑफ वेल्स शामिल था, को तैनात करने पर विचार किया। ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने उद्देश्य हासिल कर लिए हैं और ब्रिटेन के देर से समर्थन प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उनके इस बयान से स्पष्ट हुआ कि संयुक्त अभियान की संभावना अब बंद हो गई है।
कूटनीतिक तनाव की शुरुआत तब हुई जब डाउनिंग स्ट्रीट ने डिएगो गार्सिया और RAF फेयरफोर्ड जैसे बेस के शुरुआती उपयोग को मंजूरी देने से इनकार किया। प्रधानमंत्री स्टारमर ने कहा कि किसी भी ब्रिटिश भागीदारी के लिए सख्त कानूनी ढांचा और क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान देना आवश्यक है। हालांकि 1 मार्च को ब्रिटेन ने सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए बेस के उपयोग की अनुमति दी, लेकिन इस देरी ने वॉशिंगटन के साथ स्थायी खाई पैदा कर दी।
ब्रिटिश अधिकारियों ने इस मुद्दे को तूल देने से इनकार किया और कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध बनी हुई है। विदेश सचिव इवेट कूपर ने कहा कि ब्रिटेन सोशल मीडिया टिप्पणियों के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही कार्रवाई करेगा।






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