डोनाल्ड ट्रंप ने 17 देशों के सैन्य गठबंधन का किया ऐलान, ड्रग कार्टेल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ड्रग कार्टेल के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 17 देशों के नए सैन्य गठबंधन की घोषणा की। इस गठबंधन को “Americas Counter Cartel Coalition” नाम दिया गया है।
यह घोषणा मियामी में आयोजित “Shield of the Americas” समिट के दौरान की गई। ट्रंप ने कहा कि यह गठबंधन पश्चिमी गोलार्ध में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों और ड्रग कार्टेल के खिलाफ कड़े सैन्य कदम उठाने के लिए बनाया गया है।
ड्रग कार्टेल के खिलाफ ‘हार्ड पावर’ रणनीति
समिट में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अब केवल कूटनीतिक या कानूनी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि ड्रग कार्टेल से निपटने के लिए “हार्ड पावर” यानी सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा।
ट्रंप ने सहयोगी देशों को अमेरिका की हाई-प्रिसिजन मिसाइल तकनीक उपलब्ध कराने की पेशकश भी की, ताकि कार्टेल के प्रमुख नेताओं और उनके ठिकानों को निशाना बनाया जा सके।
हाल की घटनाओं के बाद तेज हुई रणनीति
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में ड्रग कार्टेल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है।
- जनवरी में वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया गया था।
- फरवरी में Jalisco New Generation Cartel के कुख्यात सरगना “एल मेन्चो” के मारे जाने की खबर सामने आई थी।
इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति को और आक्रामक बनाने का संकेत दिया है।
क्रिस्टी नोएम होंगी विशेष दूत
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी घोषणा की कि पूर्व होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम को “Shield of the Americas” की विशेष दूत (Special Envoy) बनाया गया है।
उनकी जिम्मेदारी गठबंधन के देशों के बीच सैन्य सहयोग और रणनीतिक ऑपरेशन का समन्वय करना होगा।
कुछ बड़े देश समिट से रहे दूर
हालांकि इस समिट में क्षेत्र के कुछ प्रमुख देश शामिल नहीं हुए। मेक्सिको, ब्राज़ील और कोलंबिया जैसे बड़े देश इसमें शामिल नहीं हुए, जिससे इस सैन्य रणनीति को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर मतभेद भी सामने आए हैं।
‘मोनरो डॉक्ट्रिन’ से जुड़ी नई नीति
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह गठबंधन ट्रंप प्रशासन की व्यापक विदेश नीति का हिस्सा है, जिसे “Trump Corollary to the Monroe Doctrine” कहा जा रहा है।
ट्रंप ने संकेत दिया कि फिलहाल अमेरिकी सेना का ध्यान ईरान पर भी केंद्रित है, लेकिन आने वाले समय में क्यूबा और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।





