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ईरान में कुर्द बलों को हथियार देने की योजना? अमेरिकी प्रशासन की चर्चाओं से बढ़ी हलचल

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ईरान में कुर्द बलों को हथियार उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर काम कर रही है। दावा किया जा रहा है कि इस कदम का उद्देश्य ईरान के भीतर सरकार के खिलाफ जनविद्रोह को बढ़ावा देना हो सकता है। इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन और ईरानी विपक्षी समूहों के बीच बातचीत होने की बात भी सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने इराक के कुर्द नेताओं और ईरानी विपक्षी संगठनों के साथ सैन्य सहयोग की संभावना पर चर्चा की है। हाल के संघर्ष के बाद कई कुर्द संगठनों ने सार्वजनिक बयान जारी कर ईरानी सैनिकों से सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील की है।

इधर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुर्द ठिकानों पर कार्रवाई तेज कर दी है। ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने कुर्द समूहों के ठिकानों पर दर्जनों ड्रोन हमले किए हैं। एक वरिष्ठ ईरानी कुर्द अधिकारी ने मीडिया को बताया कि आने वाले दिनों में पश्चिमी ईरान में जमीनी अभियान चलाया जा सकता है। उनका कहना है कि उन्हें अमेरिका और इजराइल से समर्थन मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, कुर्द समूहों को हथियार देने की किसी भी योजना के लिए इराक के कुर्द प्रशासन की सहमति जरूरी होगी, क्योंकि हथियारों की आपूर्ति और अभियानों के लिए इराक के कुर्द क्षेत्र का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत कुर्द बल ईरानी सुरक्षा बलों को बड़े शहरों से दूर उलझाने की कोशिश कर सकते हैं, ताकि आम नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का मौका मिल सके। कुछ प्रस्तावों में यह भी विचार किया जा रहा है कि क्या कुर्द समूह उत्तरी ईरान में कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर एक तरह का बफर ज़ोन बना सकते हैं।

हालांकि, कुर्द संगठनों के भीतर आपसी मतभेद भी हैं। अलग-अलग विचारधाराओं और पुराने तनावों के कारण वे पूरी तरह एकजुट नहीं हैं। अमेरिकी प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने भी इन समूहों के इरादों को लेकर चिंता जताई है।

कुर्द दुनिया के सबसे बड़े ऐसे जातीय समूहों में से हैं जिनका अपना स्वतंत्र देश नहीं है। लगभग 2.5 से 3 करोड़ कुर्द तुर्की, इराक, ईरान, सीरिया और आर्मेनिया के इलाकों में फैले हुए हैं। अधिकांश कुर्द सुन्नी मुस्लिम हैं, लेकिन उनकी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान काफी विविध है।

जानकारों के मुताबिक, ईरानी कुर्द सशस्त्र समूहों के हजारों लड़ाके इराक-ईरान सीमा के पास तैनात हैं और ज्यादातर का आधार इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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