व्यापार पर असर को लेकर केंद्र की हाई-लेवल बैठक, निर्यात-आयात पर निगरानी तेज

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ईंधन आपूर्ति को लेकर तैयारी तेज कर दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश के पास कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का इतना भंडार मौजूद है कि करीब 25 दिनों की घरेलू मांग पूरी की जा सकती है। साथ ही सरकार कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के लिए वैकल्पिक स्रोतों की भी तलाश कर रही है।
सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
मंत्री ने की आपूर्ति स्थिति की समीक्षा
यह जानकारी उस बैठक के बाद सामने आई, जिसमें केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति स्थिति की समीक्षा की।
अधिकारियों के मुताबिक, सरकार हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और देशभर में ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने को तैयार है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि वह स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और जरूरी कदम उठाए जाएंगे ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
आयात पर निर्भर है भारत
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है। ऐसे में अगर वहां उत्पादन या समुद्री मार्गों में बाधा आती है, तो इसका असर आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
व्यापार पर असर को लेकर भी बैठक
इसी बीच वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत वाणिज्य विभाग ने पश्चिम एशिया संकट का निर्यात-आयात पर संभावित असर जानने के लिए हितधारकों के साथ बैठक की। बैठक की अध्यक्षता विशेष सचिव सुचिंद्र मिश्रा और विदेश व्यापार महानिदेशक लव अग्रवाल ने की।
बैठक में लॉजिस्टिक्स कंपनियों, शिपिंग लाइनों, फ्रेट फॉरवर्डर्स, रिजर्व बैंक और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें शिपिंग रूट में बदलाव, ट्रांजिट समय, जहाजों की उपलब्धता, कंटेनर की कमी, भाड़ा और बीमा लागत में संभावित बढ़ोतरी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। समयबद्ध निर्यात पर असर को लेकर भी चिंता जताई गई।
सरकार ने कहा है कि मंत्रालयों के बीच समन्वय जारी रहेगा ताकि व्यापार सुचारू रहे और बाहरी झटकों से घरेलू अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके।





