भारत में फिर दौड़ेंगे चीते: बोत्सवाना से 9 चीते कूनो नेशनल पार्क में पहुंचे, संख्या हुई 48

श्योपुर, मध्यप्रदेश: एक समय एशिया से विलुप्त हो चुके चीते अब भारत की धरती पर फिर रफ्तार भर रहे हैं। शनिवार (28 फरवरी, 2026) को बोत्सवाना से लाए गए 9 चीते श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में छोड़े गए, जिससे देश में चीते की कुल संख्या 48 तक पहुंच गई। यह कदम प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में स्थायी और सुरक्षित चीता आबादी बसाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
Union Environment, Forest & Climate Change Minister भूपेन्द्र यादव ने वन्यजीवों को पार्क में तैयार किए गए एन्क्लोज़र्स में छोड़ा। मध्यप्रदेश के जनसंपर्क अधिकारी अवंतिका श्रीवास्तव के अनुसार, चीते पहले ग्वालियर पहुंचे और वहां से IAF हेलीकॉप्टरों द्वारा कूनो नेशनल पार्क तक लाए गए।
Project Cheetah: भारत में चीता पुनर्स्थापन का महत्व
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ यह प्रोजेक्ट केवल वन्यजीव पुनर्स्थापन नहीं है, बल्कि देश में चीते की स्थायी आबादी बनाने और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने का प्रयास है। MP CM ने ट्वीट किया, “मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक दायित्व को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभा रहा है। अब हमारे यहां चीतों की संख्या 48 हो गई है, जिनमें 28 शावक भारत में जन्मे हैं।”
एक समय एशिया से विलुप्त हो चुके चीते अब भारत की धरती पर रफ्तार भर रहे हैं। मध्यप्रदेश, देश में चीतों का एकमात्र घर है, जहां विशेष प्रयासों के तहत बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों को आज माननीय केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री @byadavbjp जी ने श्योपुर के कूनो नेशनल… pic.twitter.com/ctJ2ieywZL
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 28, 2026
Project Cheetah के तहत, यह तीसरी खेप है जो अफ्रीका से भारत लाई गई। इससे पहले नामीबिया (सितंबर 2022) और साउथ अफ्रीका (फरवरी 2023) से चीते भारत आए थे।
जन्म और आबादी की जानकारी
कूनो नेशनल पार्क में अब तक 39 शावक जन्म ले चुके हैं, जिनमें से 27 जीवित हैं। प्रमुख प्रजनक में शामिल हैं: नामीबिया-बॉर्न ज्वाला और आशा, साउथ अफ्रीका-बॉर्न गामिनी, वीर और निर्वा, तथा भारत-बॉर्न मुखी।
सुरक्षा और वितरण
वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार, खतरे और बीमारी के जोखिम को देखते हुए, सुरक्षित और खतरे से ग्रस्त प्रजातियों को एक ही जगह पर नहीं रखा जाता। इसलिए 36 चीते कूनो में हैं और 3 को गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी में स्थानांतरित किया गया है।
यह ऐतिहासिक कदम न केवल भारत में चीते की संख्या बढ़ाने की दिशा में है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करने की भी दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।





