दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला, सिर्फ रिश्ता टूटना या दिल टूटना अपराध नहीं

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया, जिसमें एक पुरुष पर अपनी एक्स-लवर की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ब्रेकअप या दिल टूटना सामान्य है, और इसे अपने आप में कोई अपराध नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने क्यों कहा ब्रेकअप आम है
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने अपने आदेश में कहा कि रिश्ते का टूटना किसी भी कानून के तहत उकसाने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने नोट किया कि आत्महत्या के समय कोई सुसाइड नोट या डेथ डिक्लेरेशन नहीं था, जिसमें आरोपी के उकसाने की बात हो। आठ साल के लंबे संबंध में किसी भी तरह की जबरदस्ती या उत्पीड़न की कोई शिकायत नहीं मिली।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Section 306 IPC के तहत किसी को उकसाने के लिए स्पष्ट इरादा और व्यवहार होना जरूरी है। सिर्फ दिल टूटना या रिश्ता खत्म होना पर्याप्त कारण नहीं बनता।
मामला क्या था
अक्टूबर 2025 में 27 वर्षीय महिला शिक्षक ने आत्महत्या कर ली। महिला के पिता का आरोप था कि आरोपी, जो यूनिवर्सिटी प्रोफेसर हैं, ने लड़की पर धर्म बदलकर शादी करने का दबाव डाला। आरोपी की दलील थी कि दोनों लगभग आठ साल तक रिलेशनशिप में थे, लेकिन फरवरी 2025 में परिवार के विरोध के कारण रिश्ता खत्म हो गया। इसके बाद आरोपी ने दूसरी महिला से शादी कर ली। लड़की की मौत इसके पांच दिन बाद हुई। कोर्ट ने माना कि महिला पर परिवारिक दबाव और ब्रेकअप के कारण भावनात्मक तनाव हो सकता है, न कि आरोपी की कोई उकसाने वाली कार्रवाई।
कोर्ट ने क्या फैसला किया
कोर्ट ने आरोपी को ₹25,000 के पर्सनल बॉन्ड पर बेल दी। शर्त रखी गई कि वह गवाहों या मृतका के परिवार से कोई संपर्क नहीं करेगा। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह सिर्फ प्रारंभिक निर्णय है और ट्रायल में तय होगा कि आत्महत्या किसी उकसाने, भावनात्मक तनाव या अन्य कारण से हुई।
हाईकोर्ट का संदेश
इस आदेश से यह साफ हो गया है कि ब्रेकअप या रिश्ते का टूटना कानूनी अपराध नहीं है। कोर्ट केवल तथ्यों और सबूतों के आधार पर फैसला करता है। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में दिशा-निर्देश का काम करेगा और लोगों को यह समझने में मदद करेगा कि रिश्ते टूटना सामान्य है और इसे अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता।





