राहुल गांधी और खड़गे से मिले शशि थरूर, कांग्रेस में मतभेद की अटकलों पर विराम

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद की चर्चाओं पर उन्होंने विराम लगाने की कोशिश की और इसे पूरी तरह सामान्य बैठक बताया। थरूर ने कहा कि अपनी ही पार्टी के नेताओं से मिलना कोई असामान्य बात नहीं है।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि वह संसद सत्र में भाग लेने जा रहे हैं और पार्टी नेताओं से बातचीत एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि जब बैठक होगी, तब इसकी जानकारी दे दी जाएगी, लेकिन इसमें कुछ भी असाधारण नहीं है। सूत्रों के अनुसार, संसद भवन परिसर में खड़गे के कक्ष में हुई यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। इस दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी इस बैठक में मौजूद रहे।
बैठक के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी चर्चा सकारात्मक और रचनात्मक रही। उन्होंने लिखा कि विभिन्न विषयों पर खुलकर बातचीत हुई और देश की जनता की सेवा के लिए सभी एकजुट हैं।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब हाल के दिनों में शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि केरल कांग्रेस के कुछ नेताओं के साथ उनके संबंध ठीक नहीं हैं और वह खुद को पार्टी में नजरअंदाज महसूस कर रहे हैं। यहां तक कि उनके पार्टी से बाहर जाने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं।
हालांकि, थरूर ने साफ किया कि पार्टी के भीतर अगर कोई मुद्दे हैं, तो उन पर चर्चा आंतरिक मंच पर ही होनी चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ बातों को पार्टी नेतृत्व के सामने रखने की जरूरत है और वह संसद सत्र के दौरान ऐसा करेंगे।
शशि थरूर ने यह भी कहा कि वह पिछले 17 वर्षों से कांग्रेस में हैं और उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रुख नहीं अपनाया है। जो भी समस्याएं हैं, उन्हें उचित मंच पर सुलझाया जाएगा।
इस बीच, केरल लिटरेचर फेस्टिवल में बोलते हुए शशि थरूर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर अपने रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद कड़ी कार्रवाई जरूरी थी और वह इस पर अपने समर्थन को लेकर आज भी पूरी तरह आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने खुद ऐसी कार्रवाई की वकालत की थी, तो इसकी आलोचना करने का सवाल ही नहीं उठता।





