डावोस में ट्रंप का संदेश: ग्रीनलैंड पर नियंत्रण से मजबूत होगा अमेरिका

डावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 70 मिनट के भाषण में कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। बुधवार (21 जनवरी 2026) को दिए गए इस संबोधन में उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की दावेदारी दोहराई और कहा कि इस मुद्दे पर तुरंत बातचीत होनी चाहिए। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करता है तो इससे नाटो को कोई खतरा नहीं होगा।
अपने देश की अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया का “आर्थिक इंजन” है। उन्होंने महंगाई को काबू में करने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के अपने प्रयासों का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने यूरोप की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वह “सही दिशा में नहीं बढ़ रहा है”। इस दौरान सम्मेलन स्थल के बाहर कुछ प्रदर्शनकारियों की आवाजें भी सुनाई दीं, हालांकि उनके नारे स्पष्ट नहीं थे।
ट्रंप ने एक बार फिर यह दावा किया कि उन्होंने “भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका”, जैसा कि वे पहले भी कई बार कह चुके हैं। इससे पहले दिन में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में वास्तविक रूप से 6–8 प्रतिशत और नाममात्र (नॉमिनल) रूप से 10–13 प्रतिशत की दर से बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि मध्यम महंगाई और मजबूत विकास भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा देंगे।
यूक्रेन युद्ध पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी डावोस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात होगी। हालांकि, ज़ेलेंस्की के सोशल मीडिया पोस्ट और उनके कार्यालय के बयान से साफ हुआ कि वे उस समय यूक्रेन की राजधानी कीव में थे और रूसी हमलों के बाद ऊर्जा स्थिति पर बैठक कर रहे थे। एक यूक्रेनी अधिकारी ने बताया कि ज़ेलेंस्की ने अभी डावोस जाने का फैसला नहीं किया है, क्योंकि अमेरिका की ओर से यह साफ नहीं था कि ट्रंप के साथ कोई ठोस बैठक होगी या नहीं।
WEF अध्यक्ष बॉर्गे ब्रेंडे के सवालों के जवाब में ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्ष समझौता नहीं करते हैं, तो यह उनकी बड़ी गलती होगी।
अपने भाषण में ट्रंप ने अमेरिका में चल रही धोखाधड़ी की जांच का भी जिक्र किया और कहा कि करीब 19 अरब डॉलर की धोखाधड़ी पर कार्रवाई हो रही है, जिसका संबंध सोमाली समुदाय के कुछ लोगों से बताया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणी भी की। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने सोमाली समुदाय को लेकर तीखी भाषा का इस्तेमाल किया हो। पिछले महीने भी उन्होंने कहा था कि वे अमेरिका में सोमाली प्रवासियों को नहीं चाहते, यह आरोप लगाते हुए कि वे अमेरिकी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर ज्यादा निर्भर हैं।
डावोस में ट्रंप के इस संबोधन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति से जुड़े कई मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।





