स्टार्टअप डे स्पेशल: भारतीय कंपनियां जिन्होंने दुनिया में बनाई अपनी मजबूत पहचान

भारत के स्टार्टअप आज केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं। टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और स्केलेबल बिजनेस मॉडल के दम पर भारतीय कंपनियां अब वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ी हैं। इन स्टार्टअप्स ने न सिर्फ विदेशों में कारोबार फैलाया, बल्कि यह भी साबित किया कि भारत से निकले आइडियाज दुनिया की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
जोहो: बिना निवेश के बनी भारत की सबसे बड़ी ग्लोबल SaaS कंपनी
जोहो की शुरुआत साल 1996 में वेंकट नटराजन द्वारा तमिलनाडु से की गई थी। शुरुआत में यह एक छोटा सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी थी, लेकिन आज जोहो 180 से ज्यादा देशों में अपने 50 से अधिक बिजनेस सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराती है। कंपनी का अनुमानित वार्षिक टर्नओवर 1 अरब डॉलर से ज्यादा है। जोहो की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने कभी भी वेंचर कैपिटल या बाहरी निवेश नहीं लिया और पूरी तरह बूटस्ट्रैप्ड रहते हुए ग्लोबल टेक जाइंट बन गई। अमेरिका, यूरोप, एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में जोहो के ग्राहक हैं और यह कंपनी ‘मेड इन इंडिया’ की आत्मनिर्भर सफलता का सबसे मजबूत उदाहरण मानी जाती है।
फ्रेशवर्क्स: भारत से निकलकर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज तक पहुंचा स्टार्टअप
फ्रेशवर्क्स की स्थापना 2010 में गिरिश माथरुबूथाम ने की थी। इसकी शुरुआत चेन्नई से हुई, लेकिन बाद में कंपनी ने अमेरिका को अपना मुख्य हेडक्वार्टर बनाया। फ्रेशवर्क्स का अनुमानित वार्षिक टर्नओवर 600 मिलियन डॉलर से ज्यादा है। कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि 2021 में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होना रही, जिससे यह पहली भारतीय SaaS कंपनियों में शामिल हो गई जिसने वॉल स्ट्रीट तक का सफर तय किया। आज फ्रेशवर्क्स के ग्राहक 120 से ज्यादा देशों में हैं और इसके सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स कस्टमर सपोर्ट और बिजनेस ऑटोमेशन के लिए दुनियाभर में इस्तेमाल किए जाते हैं।
ओयो: भारत से शुरू होकर 80 से ज्यादा देशों में फैला होटल ब्रांड
ओयो की स्थापना 2013 में रितेश अग्रवाल ने की थी। शुरुआत में यह एक बजट होटल एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी ब्रांड बन गया। ओयो आज एशिया, यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट समेत 80 से ज्यादा देशों में ऑपरेट करता है। कंपनी का अनुमानित टर्नओवर कई अरब डॉलर के स्तर पर रहा है। ओयो की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उसने होटल इंडस्ट्री को टेक्नोलॉजी से जोड़कर छोटे होटलों को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर जगह दिलाई और भारतीय स्टार्टअप को इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी मैप पर स्थापित किया।
उड़ान: छोटे व्यापारियों से शुरू होकर इंटरनेशनल B2B प्लेटफॉर्म
उड़ान की शुरुआत 2016 में की गई थी और इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और थोक व्यापारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना था। भारत में सफल होने के बाद उड़ान ने साउथ एशिया के बाजारों में भी कदम रखा। कंपनी का अनुमानित टर्नओवर अरबों रुपये में है और यह भारत के सबसे बड़े B2B स्टार्टअप्स में गिनी जाती है। उड़ान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने भारतीय व्यापार प्रणाली को डिजिटल बनाया और यह दिखाया कि भारत की लोकल बिजनेस समस्या का समाधान ग्लोबल स्तर पर भी लागू किया जा सकता है।
लेंसकार्ट: भारत का चश्मा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान
लेंसकार्ट की स्थापना 2010 में पीयूष बंसल द्वारा की गई थी। शुरुआत एक ऑनलाइन eyewear स्टोर के रूप में हुई, लेकिन आज लेंसकार्ट एक मजबूत ओम्नीचैनल ब्रांड बन चुका है। कंपनी सिंगापुर, मिडिल ईस्ट और अमेरिका जैसे देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। लेंसकार्ट का अनुमानित टर्नओवर 2 अरब डॉलर के करीब है। इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने भारतीय ब्रांड को ग्लोबल कंज्यूमर मार्केट में भरोसेमंद नाम बनाया और टेक्नोलॉजी आधारित eyewear मॉडल को सफल किया।
ओला: भारतीय मोबिलिटी स्टार्टअप की वैश्विक पहचान
ओला की शुरुआत 2010 में भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी ने की थी। भारत में कैब एग्रीगेशन से शुरू होकर ओला ने ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों में भी अपनी सेवाएं दीं। कंपनी अब इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट पर खास ध्यान दे रही है और Ola Electric के जरिए ग्लोबल EV मार्केट में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। ओला की अनुमानित वैल्यूएशन और टर्नओवर अरबों डॉलर के स्तर पर है। इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय मोबिलिटी सेक्टर को टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी से जोड़ना है।
Startup Day पर ये सभी कंपनियां इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय स्टार्टअप्स अब केवल लोकल खिलाड़ी नहीं रहे। इनकी शुरुआत भले ही भारत की जमीन से हुई हो, लेकिन इनका विजन हमेशा ग्लोबल रहा। इन कंपनियों ने दिखा दिया कि सही सोच, इनोवेशन और मेहनत के साथ भारत से निकला हर आइडिया दुनिया में अपनी पहचान बना सकता है। मेड इन इंडिया अब सिर्फ एक टैग नहीं, बल्कि एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है।





