विदेश

पुतिन–बुश बातचीत के दस्तावेज़ सार्वजनिक: पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर शुरुआती दौर से थी चिंता

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के बीच 2001 से 2008 के दौरान हुई निजी बैठकों और फोन बातचीत के नए दस्तावेज़ सामने आए हैं। इनसे पता चलता है कि उस समय उच्च स्तर पर पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही थी।

ये शब्दशः बातचीत के रिकॉर्ड अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव ने इस हफ्ते सार्वजनिक किए हैं। सूचना के अधिकार कानून (FOIA) के तहत कानूनी लड़ाई के बाद इन दस्तावेज़ों को गोपनीयता से मुक्त किया गया। ये बातचीत ऐसे समय की है, जब 9/11 आतंकी हमलों के बाद अमेरिका और रूस आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे थे।

जून 2001 में स्लोवेनिया में हुई पहली आमने-सामने की मुलाकात के दौरान पुतिन ने पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति और वहां सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ के हाथों में मौजूद परमाणु हथियारों को लेकर खुलकर चिंता जताई थी। उन्होंने पाकिस्तान को अस्थिर देश बताया और कहा कि दुनिया इसके खतरों को नजरअंदाज कर रही है। इस पर बुश ने चिंता को स्वीकार किया, लेकिन पाकिस्तान से बातचीत और सहयोग जारी रखने की बात कही।

9/11 के बाद दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ा और परमाणु प्रसार रोकने का मुद्दा बार-बार चर्चा में आने लगा। साल 2005 तक व्हाइट हाउस में हुई बातचीत में पाकिस्तान और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बीच संभावित संबंधों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने खुफिया सूचनाओं का जिक्र किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान की परमाणु मशीनों में पाकिस्तानी मूल का यूरेनियम मिला है।

इन चर्चाओं में ए.क्यू. खान नेटवर्क का मुद्दा भी उठा। यह नेटवर्क पाकिस्तानी वैज्ञानिक ए.क्यू. खान से जुड़ा था, जिन्होंने बाद में परमाणु तकनीक बेचने की बात स्वीकार की थी। बुश ने पुतिन को बताया कि मुशर्रफ सरकार ने खान को नजरबंद कर दिया है, लेकिन उन्हें इस बात की निराशा थी कि पाकिस्तान ने पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की।

बातचीत के दौरान दोनों राष्ट्रपति इस आशंका को लेकर भी चिंतित दिखे कि कहीं परमाणु हथियार या सामग्री कट्टरपंथी ताकतों या गैर-सरकारी समूहों के हाथ न लग जाए। पुतिन ने रूस की सुरक्षा को लेकर खतरे गिनाए, जबकि बुश ने विचारधारा से प्रेरित सरकारों के परमाणु हथियार हासिल करने को बड़ा जोखिम बताया।

इन दस्तावेज़ों से यह भी पता चलता है कि उस दौर में अमेरिका और रूस के रिश्ते काफी अच्छे थे। बुश ने कई बार पुतिन पर व्यक्तिगत भरोसा जताया और उन्हें संकट के समय भरोसेमंद साझेदार बताया। हालांकि बाद में इराक युद्ध, नाटो विस्तार और मिसाइल रक्षा योजनाओं को लेकर दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए।

अमेरिकी नेशनल आर्काइव्स द्वारा जारी किए गए ये दस्तावेज़ उस दौर की दुर्लभ झलक पेश करते हैं, जब अमेरिका और रूस मिलकर वैश्विक स्तर पर परमाणु प्रसार रोकने की कोशिश कर रहे थे, इससे पहले कि भू-राजनीतिक तनाव दोबारा बढ़ जाए।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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