जनगणना 2027: पूरी तरह डिजिटल होगी भारत की अगली जनगणना, तैयारियों को अंतिम रूप

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया है। खास बात यह है कि यह तैयारी जनगणना के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत से लगभग तीन महीने पहले ही पूरी कर ली गई है। यह जनगणना भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी।
अधिकारियों के मुताबिक, इसकी तैयारी को लेकर उप-जिला, जिला और राज्य स्तर पर सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों से व्यापक विचार-विमर्श किया गया है, ताकि जमीनी स्तर पर किसी तरह की दिक्कत न हो।
हाल ही में जनगणना के पहले चरण यानी हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का सफल प्री-टेस्ट किया गया था। इस दौरान मिले फीडबैक की समीक्षा भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने की। उन्होंने ट्रायल को सफल बताते हुए कहा कि यह जनगणना 2027 की दिशा में एक अहम कदम है।
जनगणना का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच कराया जाएगा। इस चरण में घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। वहीं दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बर्फबारी वाले और विशेष क्षेत्रों में जनगणना पहले कराई जाएगी।
सरकार की योजना के तहत इस महाअभियान में लाखों कर्मचारी लगाए जाएंगे। करीब 30 लाख फील्ड वर्कर और 18 हजार से ज्यादा तकनीकी विशेषज्ञ इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। इससे एक करोड़ से अधिक मानव-दिवस का रोजगार भी पैदा होगा। जनगणना के लिए मोबाइल ऐप के जरिए डेटा जुटाया जाएगा और उसकी निगरानी रियल-टाइम सिस्टम से की जाएगी। साथ ही डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल भी लागू होंगे।
हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने जनगणना 2027 को मंजूरी दी है, जिस पर करीब 11,718 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह आज़ादी के बाद भारत की आठवीं और कुल 16वीं जनगणना होगी। इस बार जनगणना में जाति गणना भी शामिल की जाएगी।
सरकार का कहना है कि डिजिटल माध्यम से डेटा एकत्र होने के कारण जनगणना के आंकड़े पहले के मुकाबले ज्यादा जल्दी और बेहतर तरीके से उपलब्ध कराए जा सकेंगे, जिसके लिए आधुनिक डेटा विजुअलाइजेशन टूल और एक केंद्रीय मॉनिटरिंग पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा।





