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अमेरिका ने भारत के ‘शांति विधेयक 2025’ का किया स्वागत, परमाणु ऊर्जा सहयोग होगा मजबूत

अमेरिका ने भारत के ‘शांति विधेयक (SHANTI Bill) 2025’ का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा साझेदारी और शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग को मजबूत करने वाला कदम बताया है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि भारत के नए शांति विधेयक से ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त नवाचार और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा मिलेगा। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि अमेरिका इस दिशा में भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।

SHANTI का पूरा नाम है ‘Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India’ विधेयक, 2025। यह विधेयक संसद से गुरुवार को पारित हुआ। सरकार के अनुसार, यह विधेयक भारत के परमाणु कानूनों को आधुनिक और मजबूत बनाता है। इसके तहत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों को सीमित भागीदारी की अनुमति दी गई है, लेकिन यह पूरी तरह से नियामकीय निगरानी के तहत होगा।

अब तक देश में केवल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां ही परमाणु ऊर्जा संयंत्र चला सकती थीं, हालांकि संयुक्त उपक्रमों (जॉइंट वेंचर) की अनुमति थी। लेकिन शांति विधेयक के लागू होने के बाद कोई भी निजी कंपनी या संयुक्त उद्यम लाइसेंस लेकर परमाणु बिजली संयंत्र या रिएक्टर का निर्माण, संचालन या बंद (डी-कमीशनिंग) कर सकेगा। इसके लिए रेडिएशन सुरक्षा और अन्य जरूरी मानकों की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

इस विधेयक के तहत 1962 का परमाणु ऊर्जा अधिनियम और 2010 का सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट (CLND Act) खत्म करने का प्रस्ताव है। साथ ही परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को कानूनी मान्यता दी गई है, जिससे सुरक्षा नियम और मजबूत होंगे। सरकार का कहना है कि यह विधेयक भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति को आगे बढ़ाने में मदद करेगा और देश को 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने में सहायक होगा।

शांति विधेयक को भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार माना जा रहा है, जिससे विदेशी निवेश, तकनीकी सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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