ऑपरेशन सिंदूर पर बयान से घिरे पृथ्वीराज चव्हाण, बोले— माफी मांगने का सवाल ही नहीं

पूर्व केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दिए गए अपने बयान पर उठे विवाद के बीच बुधवार को साफ कहा कि माफी मांगने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान उन्हें सवाल पूछने का अधिकार देता है और वह इस मुद्दे पर आगे विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
दरअसल, पृथ्वीराज चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर यह दावा किया था कि भारत को पहले ही दिन हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
चौहान ने कहा, “मैं सिर्फ यह जानना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मेरा देश कितना सुरक्षित है। मैंने सवाल राजनीतिक नेतृत्व से पूछे हैं, न कि देश की सशस्त्र सेनाओं से। मुझे भारतीय सेना पर पूरा सम्मान और भरोसा है।”
उन्होंने पहलगाम घटना और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूरी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई देश के सामने आनी चाहिए।
इससे पहले पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पृथ्वीराज चौहान ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना को पूरी तरह जमीन पर ही रोका गया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से विमान गिराए जाने का खतरा था।
उन्होंने कहा, “ऑपरेशन के पहले ही दिन, यानी 7 तारीख को हुई करीब आधे घंटे की हवाई झड़प में हमें पूरी तरह हार का सामना करना पड़ा। भारतीय विमान गिराए गए और इसके बाद वायुसेना के कोई भी विमान उड़ान नहीं भर सके। ग्वालियर, बठिंडा या सिरसा से अगर कोई विमान उड़ता, तो उसके गिराए जाने की आशंका थी, इसी वजह से वायुसेना को पूरी तरह ग्राउंड कर दिया गया।”
इसके साथ ही चौहान ने यह सवाल भी उठाया कि जब युद्ध हवा में लड़े जाने हैं, तो इतनी बड़ी थल सेना बनाए रखने की जरूरत क्यों है।
उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।





