जैश-ए-मोहम्मद की महिला कमांडर डॉ. शाहीन के नेटवर्क का बड़ा खुलासा

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्तार की गई डॉ. शाहीन न सिर्फ इस आतंकी संगठन की महिला विंग का संचालन कर रही थी, बल्कि वह लंबे समय तक विदेश में रहकर वहां से भी नेटवर्क मजबूत करती रही।
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. शाहीन साल 2014 से 2018 तक सऊदी अरब के एक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर काम करती रही। फिर 2018 में भारत लौटने के बाद उसने तीन साल तक कोई नौकरी नहीं की और इस दौरान घर पर ही रहती रही। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन्हीं तीन वर्षों में वह आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हुई और जैश के लिए नेटवर्क खड़ा करने लगी। इसी समय उसे संदिग्ध टेरर फंडिंग भी मिली।
साल 2021 में उसने अल फलाह यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी की और यहीं उसने व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के तहत अन्य डॉक्टरों से संपर्क बढ़ाया। इसी दौरान उसकी नजदीकियां डॉ. मुजम्मिल से बढ़ीं और रिश्ता शादी तक पहुंच गया। एजेंसियों का दावा है कि शादी का यह रिश्ता भी नेटवर्क विस्तार की रणनीति का हिस्सा था।
ताजा कार्रवाई में एनआईए ने गुरुवार देर शाम शाहीन को निशानदेही के लिए उसके अल फलाह यूनिवर्सिटी स्थित फ्लैट में ले जाकर जांच की। पहले से सील किए गए डिजिटल लॉकर को शाहीन से खुलवाया गया, जिसमें भारी मात्रा में नकदी और कीमती सामान मिला। लॉकर से 18.50 लाख रुपये नकद, सोने के दो बिस्किट, करीब 300 ग्राम जूलरी और सऊदी अरब की करेंसी बरामद हुई।
जांच एजेंसियां अब टेरर फंडिंग और विदेश कनेक्शन की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।





