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अयोध्या: विवाह पंचमी पर राम मंदिर के शिखर पर लहराएगा केसरिया ध्वज

अयोध्या, 24 नवंबर 2025 – आगामी 25 नवंबर को अयोध्या में एक और ऐतिहासिक पल दर्ज होने जा रहा है. विवाह पंचमी के पावन अवसर पर राम मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज की स्थापना की जाएगी. यह आयोजन महज एक पारंपरिक रस्म नहीं, बल्कि त्रेता युग के गौरवशाली क्षणों की याद दिलाने वाला एक दिव्य दृश्य होगा.

धर्म ध्वज का महत्व

श्री रामचरितमानस में उल्लेखित है – ”बंधन व पताका केतु और शिव बनाए मंगल हेतु”. इसका तात्पर्य यह है कि ध्वज स्वयं में मंगलकारी प्रतीक है. शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, धर्म ध्वज वह पवित्र स्थान होता है जहां समस्त देवी-देवताओं की दिव्य शक्तियां एकत्रित होती हैं. इसीलिए मंदिर के कलश पर स्थापित यह ध्वज केवल एक चिह्न नहीं, बल्कि ईश्वरीय ऊर्जा का माध्यम माना जाता है.

ध्वजारोहण का शुभ समय

ज्योतिष विशेषज्ञों ने विवाह पंचमी पर ध्वज स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को सर्वाधिक उपयुक्त बताया है. यह विशेष मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:30 बजे तक रहेगा. यह आधे घंटे की अवधि अत्यंत शुभ और मंगलकारी मानी जा रही है.

अभिजीत मुहूर्त की विशेषता

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में अभिजीत मुहूर्त को किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है. यह दिन का सबसे प्रभावशाली काल होता है क्योंकि इस दौरान सूर्य देव की ऊर्जा अपने चरम पर होती है. उल्लेखनीय है कि राम लला की प्राण प्रतिष्ठा भी इसी पावन मुहूर्त में संपन्न हुई थी. इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए ध्वज स्थापना के लिए भी यही समय चुना गया है.

समारोह की तैयारियां

ध्वजारोहण समारोह के दौरान कई पवित्र वैदिक अनुष्ठान किए जाएंगे. इनमें देवी-देवताओं का आह्वान, पंचदेव पूजन, नवग्रह शांति और विशेष यज्ञ शामिल हैं.

तकनीकी दृष्टि से भी व्यवस्थाएं पूर्णतः तैयार हैं. ध्वज के माप, दंड की सहनशक्ति, रस्सियों की मजबूती, रथयात्रा का प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और 600 किलोग्राम प्रसाद की व्यवस्था – सभी पहलुओं पर सूक्ष्म ध्यान दिया गया है.

स्थानीय नागरिकों को मिलेगी प्राथमिकता

इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री समेत देश भर के गणमान्य लोग उपस्थित होंगे. लेकिन इस बार एक विशेष निर्णय लिया गया है – अयोध्या के स्थानीय निवासियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी.

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का विचार है कि अयोध्या के निवासी स्वयं प्रभु श्रीराम के परम प्रिय हैं. इसलिए इस ऐतिहासिक घड़ी के प्रथम साक्षी उन्हीं को बनना चाहिए. यह निर्णय स्थानीय जनता के प्रति सम्मान और आस्था का प्रतीक है.

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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