खेल

आंसू, आस्था और आत्मविश्वास – जेमिमा की जीत के पीछे की अनकही कहानी

नवी मुंबई में हुए आईसीसी महिला वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भारतीय बल्लेबाज़ जेमिमा रॉड्रिग्स ने ऐसा कमाल कर दिखाया, जिसे भारतीय क्रिकेट लंबे वक्त तक याद रखेगा। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ 134 गेंदों पर नाबाद 127 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को ऐतिहासिक 5 विकेट की जीत दिलाई और टीम को फाइनल में पहुंचा दिया।

लेकिन इस जीत के पीछे की कहानी सिर्फ बल्ले की ताकत नहीं, बल्कि जेमिमा की हिम्मत, आस्था और भावनाओं की कहानी है। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेमिमा की आंखें भर आईं, जब उन्होंने बताया कि इस टूर्नामेंट के दौरान वे गहरी चिंता (anxiety) और खुद पर शक से जूझ रही थीं। “मैं बहुत ईमानदारी से कहूंगी, क्योंकि शायद कोई और भी ये महसूस कर रहा हो — टूर्नामेंट की शुरुआत में मैं बहुत चिंता में थी। हर मैच से पहले मैं अपनी मां को फोन करके रोती थी। जब आप anxiety से गुजरते हैं, तो सब कुछ सुन्न लगने लगता है,” जेमिमा ने कांपती आवाज़ में कहा।

टूर्नामेंट की शुरुआत में दो बार ‘डक’ पर आउट होने के बाद उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ मैच से बाहर कर दिया गया था। इस दौर ने उनका आत्मविश्वास हिला दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी — परिवार, दोस्तों और अपनी आस्था से ताकत ली। “मेरे मम्मी-पापा और मेरे दोस्त, खासकर अरुंधति और राधा, हमेशा मेरे साथ रहे। मैंने अरुंधति के सामने लगभग हर दिन रोया है। कई बार वो कुछ नहीं कहती थी, लेकिन उसकी मौजूदगी ही मेरे लिए काफी थी,” उन्होंने कहा। और सबसे जरूरी — मदद मांगना ठीक है।

जेमिमा ने बताया कि मुश्किल वक्त में बाइबिल पढ़ना उन्हें संबल देता था। “उसमें लिखा है, ‘रातभर रोना रह सकता है, लेकिन सुबह खुशी आती है।’ आज वो खुशी आई है — लेकिन मैं अब भी रो रही हूं,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। जब उनसे पूछा गया कि वे अपनी पारी को कैसे आंकती हैं, तो उन्होंने कहा, “मैंने आज अपने लिए नहीं खेला। मेरा लक्ष्य बस भारत को जिताना था। जब आप टीम के लिए खेलते हैं, तो भगवान भी साथ देता है।”

उनकी बातों ने पूरे प्रेस कॉन्फ्रेंस को भावनाओं से भर दिया। जेमिमा की कहानी ने दिखा दिया कि महान खिलाड़ी वही है, जो गिरने के बाद फिर उठना जानता है। उन्होंने आगे कहा, “पिछले साल मैं वर्ल्ड कप टीम से बाहर कर दी गई थी। इस साल सोचा बस कोशिश करती हूं, लेकिन चीज़ें लगातार बिगड़ती गईं। मैं मानसिक रूप से ठीक नहीं थी, हर दिन रोती थी। लेकिन मेरे पास ऐसे लोग थे जो मुझ पर भरोसा करते थे। और फिर भगवान ने सब संभाल लिया।”

मैच के दौरान जेमिमा खुद को शांत रखने के लिए सेल्फ-टॉक करती रहीं। उन्होंने बताया कि आखिरी ओवरों में थकान के बावजूद उन्होंने खुद को एक बाइबिल की पंक्ति याद दिलाई “उसमें लिखा है — ‘बस स्थिर रहो, भगवान तुम्हारे लिए लड़ेगा।’ और मैंने बस वही किया — मैं खड़ी रही, और उसने मेरे लिए लड़ाई लड़ी।”

जीत के बाद छलके जज्बात: पिता से लिपटकर रो पड़ीं जेमिमा

भारत को जीत दिलाने के बाद जेमिमा रॉड्रिग्ज का एक वीडियो सामने आया है, जिसने हर क्रिकेटप्रेमी को भावुक कर दिया। वीडियो में जेमिमा अपने पिता से लिपटकर फूट-फूटकर रोती दिखती हैं। ये आंसू दुख के नहीं, बल्कि गर्व और खुशी के आंसू थे — उस पिता के, जिसने अपनी बेटी को एक खिलाड़ी बनने का सपना दिखाया था, और उस बेटी के, जिसने उस सपने को सच कर दिखाया।

नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में जब जीत का क्षण आया, तो बाप और बेटी दोनों ही अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। ये वही पल था, जिसके लिए जेमिमा ने अपना पहला बल्ला उठाया था, और उनके पिता ने अनगिनत रातें अपनी बेटी की प्रैक्टिस के लिए कुर्बान की थीं।

 

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वीडियो में जेमिमा के पिता उन्हें गले लगाकर सांत्वना देते नजर आए, जबकि जेमिमा की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। इसके बाद पूरा परिवार भी उन्हें गले से लगाकर भावुक हो गया। जेमिमा अपनी मां के गले लगीं, और फिर अपने बाकी परिवार के सदस्यों को भी गले लगाया।

इन कुछ पलों में वह सब कुछ था — मेहनत, संघर्ष, परिवार का प्यार और जीत की कीमत। उस दिन जेमिमा ने सिर्फ मैच नहीं जीता — उन्होंने हर उस इंसान का दिल जीत लिया, जो कभी डर, चिंता या असफलता से लड़ा है। भारत को फाइनल तक पहुंचाने वाली यह पारी सिर्फ क्रिकेट का अध्याय नहीं, बल्कि हिम्मत, विश्वास और इंसानियत की मिसाल बन गई।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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