AI साइंस-टेक्नोलॉजी

एआई बदल सकता है वर्कवीक का स्वरूप, मिलेगी ज्यादा फ्री टाइम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ काम करने के तरीके को ही नहीं, बल्कि हमारी पूरी वर्किंग लाइफ को बदलने की क्षमता रखता है। Zoom के CEO एरिक युआन ने कहा है कि भविष्य में पांच दिन की वर्कवीक की जरूरत खत्म हो सकती है। AI की मदद से कंपनियां कर्मचारियों को तीन या चार दिन काम करने का विकल्प दे पाएंगी, जिससे लोगों को ज्यादा फ्री टाइम मिल सकेगा।

एआई एजेंट्स करेंगे काम

युआन के मुताबिक, हर टेक्नोलॉजी शिफ्ट की तरह AI भी कुछ नौकरियों को खत्म करेगा, लेकिन इसके साथ ही नई नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे। उदाहरण के तौर पर, एंट्री-लेवल इंजीनियरों का कोडिंग का काम AI कर सकता है, लेकिन उस कोड को मैनेज करने के लिए इंसानों की जरूरत बनी रहेगी। इसके अलावा, AI डिजिटल एजेंट्स तैयार करेगा और इन एजेंट्स को संभालने के लिए भी नए रोल सामने आएंगे।

वर्कलोड से मिलेगी आजादी

AI का रोजगार पर असर लंबे समय से बहस का विषय रहा है। कुछ बिजनेस लीडर्स का मानना है कि यह बड़े पैमाने पर नौकरी की हानि कर सकता है, खासकर व्हाइट-कॉलर नौकरियों में। वहीं, Google DeepMind के CEO डेमिस हासाबिस ने कहा है कि अगले 5-10 साल में अगर आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) आ गया, तो दुनिया “गोल्डन एरा” में प्रवेश कर सकती है। इस दौर में काम का बोझ कम होगा और लोगों को ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी।

बिल गेट्स और जेनसन हुआंग भी जता चुके हैं संभावना

युआन से पहले माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग भी वर्कवीक घटने की संभावना जता चुके हैं। गेट्स ने कहा था कि भविष्य में अगर समाज तीन दिन काम करके भी चल सके, तो यह पूरी तरह स्वीकार्य होगा। वहीं हुआंग ने चार दिन के वर्कवीक की बात कही थी, लेकिन चेतावनी दी थी कि इससे काम कम नहीं होगा बल्कि लोग इन चार दिनों में और ज्यादा व्यस्त हो सकते हैं।

जीवनशैली पर गहरा असर

यह साफ है कि AI अब सिर्फ काम को आसान बनाने तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में यह हमारी नौकरी, जीवनशैली और काम के घंटों तक पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। तीन या चार दिन का वर्कवीक अब एक कल्पना नहीं, बल्कि जल्द ही हकीकत बन सकता है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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