45 से 110 अरब डॉलर तक पहुंचेगा भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट, TCS ने बढ़ाया कदम

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने गुरुवार को चिपलेट-बेस्ड सिस्टम इंजीनियरिंग सर्विस लॉन्च करने की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य सेमीकंडक्टर कंपनियों को तेज़ और दमदार चिप्स बनाने में मदद करना है। इसके साथ ही भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनाने के विज़न को भी मजबूती मिलेगी।
भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। 2024-25 में इसका आकार 45-50 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2030 तक यह 100-110 अरब डॉलर के स्तर पर होने की संभावना जताई जा रही है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) को मंजूरी दी है।
चिपलेट्स छोटे-छोटे इंटीग्रेटेड सर्किट होते हैं जिन्हें जोड़कर एडवांस्ड चिप तैयार की जा सकती है। जैसे-जैसे ट्रांजिस्टर को छोटा करने की पारंपरिक तकनीक अपनी सीमा पर पहुंच रही है, वैसे-वैसे चिपलेट्स की मांग बढ़ रही है। इस तकनीक से न सिर्फ लागत घटती है, बल्कि कंपनियां अपने नए प्रोडक्ट्स को मार्केट में तेजी से उतार पाती हैं।
दुनिया के लगभग 20% चिप डिजाइन इंजीनियर भारत से हैं। यही वजह है कि कई ग्लोबल कंपनियां यहां मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली फैसिलिटीज में निवेश कर रही हैं। अब TCS की नई सर्विस इस ग्रोथ को और रफ्तार देगी और भारतीय व विदेशी कंपनियों को वर्ल्ड-क्लास विशेषज्ञता का फायदा मिलेगा।
TCS पहले से ही 2.5D और 3D इंटरपोज़र्स, मल्टी-लेयर ऑर्गेनिक सब्सट्रेट्स जैसी एडवांस्ड पैकेज डिजाइन सर्विस मुहैया करा रही है। इन तकनीकों से कंपनियां बेहतर सिग्नल क्वालिटी, तेज़ परफॉर्मेंस और कॉम्पैक्ट डिजाइन वाले नेक्स्ट-जेन मल्टी-चिप प्रोडक्ट्स बना पाती हैं। कंपनी का कहना है कि यह नई सर्विस सेमीकंडक्टर कंपनियों को फ्लेक्सिबिलिटी, स्केलेबिलिटी और तेज़ मार्केट टाइमिंग मुहैया कराएगी।
हाल ही में TCS ने एक नॉर्थ अमेरिकन सेमीकंडक्टर कंपनी के साथ चिपलेट-बेस्ड डिजाइन पर काम किया। इस प्रोजेक्ट के ज़रिये अलग-अलग प्रकार के चिप्स को एक सिस्टम में सफलतापूर्वक इंटीग्रेट किया गया, जिससे डिजाइन प्रोसेस और ज्यादा आधुनिक व प्रभावी हो गया।





