दिल्ली में यमुना की सफाई के लिए नई योजना शुरू, छोटे नालों पर होगी खास नजर

दिल्ली में यमुना नदी को साफ और फिर से जीवित करने के लिए एक नई योजना शुरू की गई है। इस योजना का नाम है “अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान (URMP)”, जिसे राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और दिल्ली सरकार के साथ मिलकर शुरू किया है। इसका मकसद यमुना नदी की स्थिति को बेहतर करना है, और इसके लिए वैज्ञानिक आंकड़ों और स्थानीय लोगों की भागीदारी का सहारा लिया जाएगा।
NMCG के डायरेक्टर जनरल राजीव कुमार मित्तल ने इस योजना को “लाइव डॉक्यूमेंट” बताया है। उन्होंने कहा कि ये कोई सिर्फ़ रिपोर्ट बनाकर छोड़ देने वाली योजना नहीं है। इसमें लगातार सुधार और बदलाव होते रहने चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि “यह योजना वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जोखिम के आकलन और लोगों की भागीदारी से तैयार होनी चाहिए।”
दिल्ली के जल मंत्री परवेश वर्मा ने जानकारी दी कि राजधानी में यमुना में गिरने वाले 22 बड़े नालों में शामिल 300 छोटे-छोटे नालों की ड्रोन सर्वे शुरू हो चुकी है। इससे यह पता चलेगा कि ये नाले कहां से शुरू होते हैं, किस रास्ते से बहते हैं और किस जगह जाकर गंदगी को यमुना में छोड़ते हैं।
इन जानकारियों के आधार पर छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे, जिन्हें D-STPs कहा जाता है। ये उन इलाकों में लगाए जाएंगे जहां जगह की कमी की वजह से बड़े ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाए जा सकते। मंत्री ने बताया कि 40 ऐसे D-STPs के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि इंटरसेप्टर सीवर प्रोजेक्ट को इस साल के अंत तक पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, कई जगहों पर सीवेज और बरसात के पानी की पाइपों को ठीक किया जा रहा है क्योंकि इनके गलत कनेक्शन से प्रदूषण और जलभराव की समस्या होती है।
फिलहाल यमुना का सबसे ज्यादा गंदा हिस्सा वज़ीराबाद से ओखला के बीच का 22 किलोमीटर का इलाका है। यहां हर दिन करीब 800 मिलियन गैलन बिना साफ किया गया सीवेज यमुना में गिरता है। यही हिस्सा अभी सफाई अभियान का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
इस योजना के ज़रिए सरकार को उम्मीद है कि यमुना की हालत में जल्द ही सुधार दिखेगा और दिल्ली की यह पवित्र नदी फिर से साफ और सुंदर बनेगी।





