विदेश

भारत का ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’: म्यांमार में भूकंप राहत के लिए विशेषज्ञ टीम और 625 टन मदद भेजी गई

म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत व्यापक राहत और सहायता अभियान शुरू किया है। म्यांमार सरकार के औपचारिक अनुरोध पर भारतीय सेना की एक विशेषज्ञ इंजीनियर टीम म्यांमार पहुंची है। इस टीम का नेतृत्व एक कमांडिंग ऑफिसर कर रहे हैं और उनके साथ पाँच अन्य सैनिक शामिल हैं।

भारतीय टीम वर्तमान में मांडले और नैप्यीटॉ क्षेत्रों में भूकंप से प्रभावित ढांचों का तकनीकी सर्वेक्षण कर रही है। 8 अप्रैल को टीम ने मांडले डिवीजन में तीन प्रमुख पुलों की स्थिति की जांच की, जबकि 10 अप्रैल को नैप्यीटॉ में चार पुलों और करीब 350 क्षतिग्रस्त इमारतों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान म्यांमार सरकार के कई मंत्रालयों के अधिकारी मौजूद रहे और पुलिस सुरक्षा भी प्रदान की गई।

जांच के दौरान भारतीय टीम ने संरचनाओं की मजबूती, सुरक्षा और भविष्य में उपयोग की संभावना का मूल्यांकन किया। टीम के डिमोलिशन एक्सपर्ट ने विशेष रूप से मांडले में इरावदी नदी पर बने पुराने अवा पुल का निरीक्षण किया और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम किया। प्रारंभिक सिफारिशों में कमजोर इमारतों को नियंत्रित रूप से गिराने और क्षतिग्रस्त पुलों को हटाकर नदी में जल प्रवाह और नाव यातायात बहाल करने की सलाह दी गई है।

अब तक भारत ने इस राहत अभियान के तहत 6 विमान और 5 नौसैनिक जहाजों के जरिए कुल 625 टन राहत सामग्री म्यांमार भेजी है। 5 अप्रैल को आईएनएस घड़ियाल के माध्यम से 442 टन अतिरिक्त खाद्य सामग्री – जिसमें चावल, तेल, नूडल्स और बिस्किट शामिल हैं – थिलावा पोर्ट पर यांगून के मुख्यमंत्री यू सो थेइन को सौंपी गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भूकंप के बाद म्यांमार के जनरल मिन आंग हलाइंग से मुलाकात कर संवेदना प्रकट की और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। दोनों नेताओं की यह मुलाकात 4 अप्रैल को बैंकॉक में बिम्सटेक सम्मेलन के दौरान हुई थी।

भारतीय दूतावास ने कहा है कि भारत, म्यांमार के भूकंप पीड़ितों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर सहायता भेजता रहेगा।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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