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महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का प्रकोप जारी, मरीजों की संख्या 207 तक पहुंची, अब तक 9 की मौत

महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। राज्य में अब तक 207 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 180 मरीजों में GBS की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, शेष मरीजों में इसके लक्षण देखे गए हैं और उनका इलाज जारी है।

GBS के कारण अब तक 9 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें से 4 मरीजों की मौत GBS के कारण हुई है, जबकि अन्य की मौत संदिग्ध मामलों के तौर पर दर्ज की गई है। 13 फरवरी को कोल्हापुर में GBS से नौवीं मौत की पुष्टि हुई।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में सबसे ज्यादा मामले पुणे और पिंपरी चिंचवड़ से सामने आए हैं। GBS एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है। इससे मरीजों को मांसपेशियों में कमजोरी, झुनझुनी और कुछ मामलों में पक्षाघात (लकवा) जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि GBS के अधिकतर मामलों का संबंध दूषित पानी और भोजन से हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी नामक बैक्टीरिया इस प्रकोप के पीछे जिम्मेदार हो सकता है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर प्रदूषित जल स्रोतों में पाया जाता है और संक्रमित व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है।

GBS से पीड़ित मरीजों में शरीर के हिस्सों का सुन्न पड़ना, हाथ-पैरों में कमजोरी और तेज दर्द जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। कुछ गंभीर मामलों में यह बीमारी पक्षाघात (Paralysis) का कारण भी बन सकती है।

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस प्रकोप को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं। दूषित जल स्रोतों की जांच की जा रही है और प्रभावित इलाकों में सफाई एवं स्वच्छता अभियान तेज कर दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे साफ-सुथरा पानी पिएं, खाने-पीने की चीजों को अच्छी तरह से धोकर इस्तेमाल करें और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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