ममता कुलकर्णी बनीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर

बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा रहीं ममता कुलकर्णी ने आध्यात्म की राह पर चलते हुए संन्यास ले लिया है। प्रयागराज महाकुंभ में शुक्रवार को संगम में पिंडदान कर उन्होंने गृहस्थ जीवन को त्याग दिया। इसके बाद उन्हें किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई। ममता का नया नाम अब श्री यामिनी ममता नंद गिरि होगा।
ममता कुलकर्णी ने फिल्मी दुनिया को वर्षों पहले अलविदा कह दिया था और साध्वी का जीवन अपना लिया था। 25 सालों बाद भारत लौटकर उन्होंने महाकुंभ में शामिल होने को अपने जीवन का सबसे पवित्र अनुभव बताया। ममता ने कहा, “महाकुंभ की भव्यता और संतों के आशीर्वाद ने मेरे जीवन को पूर्ण कर दिया है। यह महादेव और महाकाली का आदेश था।”

शुक्रवार, 24 जनवरी को ममता ने प्रयागराज के संगम में पिंडदान किया। इसके बाद किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी त्रिपाठी ने उनका पट्टाभिषेक किया। ममता के भगवा वस्त्र धारण कर किन्नर अखाड़े के शिविर में पहुंचने पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
लक्ष्मी त्रिपाठी ने बताया कि ममता पिछले दो साल से सनातन धर्म से जुड़ने की इच्छा जाहिर कर रही थीं। पहले वे जूना अखाड़े की शिष्या थीं, लेकिन बाद में किन्नर अखाड़े से जुड़ गईं और महामंडलेश्वर बनने की इच्छा व्यक्त की। इसके लिए उन्होंने आवश्यक परंपराओं का पालन किया।

ममता कुलकर्णी ने 1991 में तमिल फिल्म ‘ननबरगल’ से अभिनय की शुरुआत की थी और बॉलीवुड में ‘मेरा दिल तेरे लिए’ से कदम रखा। ‘आशिक आवारा’, ‘करण अर्जुन’, ‘क्रांतिवीर’ जैसी हिट फिल्मों में काम करने वाली ममता को 1993 में बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। उनकी आखिरी फिल्म ‘कभी तुम कभी हम’ 2002 में रिलीज हुई थी।
हालांकि, उनका करियर कई विवादों में भी घिरा रहा। 1993 में टॉपलेस फोटोशूट और फिल्म ‘चाइना गेट’ के दौरान निर्देशक राजकुमार संतोषी से विवाद ने सुर्खियां बटोरीं। इसके अलावा, उनका नाम अंडरवर्ल्ड ड्रग माफिया विक्की गोस्वामी से जोड़ा गया, लेकिन उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया।

ममता ने अपनी आत्मकथा ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ एन योगिनी’ में लिखा था कि उन्होंने भगवान को ही अपना पहला और अंतिम प्यार मान लिया है। अब संन्यास लेकर ममता पूरी तरह साध्वी का जीवन जी रही हैं। महाकुंभ में दीक्षा लेकर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनने के बाद ममता ने कहा, “मैंने कुछ नहीं किया। यह सब महादेव और मेरे गुरु के आदेश पर हुआ।”
ममता कुलकर्णी का यह रूप उनके प्रशंसकों और भक्तों के लिए एक नई प्रेरणा का स्रोत बन गया है।





