दलित शोध के लिए शैलजा को मिला 800 हजार डॉलर का “जीनियस” अनुदान

इतिहासकार और सिनसिनाटी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शैलजा पैक को देश में दलित महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में लिखने के लिए मैक आर्थर फाउंडेशन से 800,000 डॉलर का प्रभावशाली अनुदान मिला है. बता दें कि फाउंडेशन हर साल असाधारण उपलब्धियों या क्षमता वाले लोगों को पुरस्कार देता है.
बता दें कि इसी के साथ मैकआर्थर फेलोशिप प्राप्त करने वाली पहली दलित व्यक्ति बन गई हैं, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘जीनियस ग्रांट’ कहा जाता है.
फाउंडेशन ने फेलोशिप की घोषणा करते हुए कहा, “दलित महिलाओं के बहुमुखी अनुभवों पर अपने ध्यान के माध्यम से, पैक जातिगत भेदभाव की स्थायी प्रकृति और अस्पृश्यता को कायम रखने वाली ताकतों को स्पष्ट करती है.”
पैक, सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में इतिहास की एक प्रतिष्ठित अनुसंधान प्रोफेसर हैं, जहां वह महिला, लिंग और कामुकता अध्ययन तथा एशियाई अध्ययन की संबद्ध संकाय भी हैं.
मैकआर्थर फेलोशिप, जिसे लोकप्रिय रूप से जीनियस अनुदान के रूप में जाना जाता है, शिक्षा और विज्ञान से लेकर कला और सक्रियता तक के लोगों को दी जाती है, जो फाउंडेशन के अनुसार “अपनी क्षमता में निवेश के रूप में असाधारण रूप से प्रतिभाशाली और रचनात्मक व्यक्ति हैं.”
फाउंडेशन ने कहा चयन प्रप्त सिफारिशों के आधार पर गुमनाम रूप से किया जाता है तथा अनुदान के लिए आवेदन या लॉबिंग की अनुमति नहीं दी जाती है, जो बिना किसी शर्त के दिया जाता है तथा पांच वर्षों में दिया जात है. उन्होंने आगे कहा, कि उनकी हालिया परियोजना “तमाशा की महिला कलाकारों के जीवन पर केंद्रित है, जो अश्लील लोक रंगमंच का एक लोकप्रीय रूप है, जिसका अभ्यास महाराष्ट्र में सदियों से मुख्य रूप से दिलतों द्वारा किया जाता रहा है.”





