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फैक्ट चेक: रवीश कुमार के साथ नक्सलवादियों पर बात करते हुए कन्हैया कुमार का या वीडियो अधूरा और पुराना है, पूरा सच जानने के लिए पढ़ें

फैक्ट चेक: रवीश कुमार के साथ नक्सलवादियों पर बात करते हुए कन्हैया कुमार का या वीडियो अधूरा और पुराना है, पूरा सच जानने के लिए पढ़ें

 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो उत्तर पूर्वी दिल्ली से INDIA गठबंधन के प्रत्याशी कन्हैया कुमार का के एक इंटरव्यू का है। जहां वह NDTV के पूर्व पत्रकार रविश कुमार को इंटरव्यू देते हुए नजर आ रहे हैं।

वायरल वीडियो में कन्हैया कुमार पत्रकार रवीश कुमार से कहते हैं कि “सारे शहीदों को शहादत का दर्जा दिया जाए और जो इनको शहीद बना रहे हैं, उनके खिलाफ जंग छेड़ी जाए। मैं कहता हूं कि जिनको नक्सली बताकर मारा जा रहा है, वो भी शहीद हैं, भोलेभाले आदिवासी हैं। जो तथाकथित नक्सली हिंसा में शहीद हो रहा है, वो भी उनके जैसा ही एक गरीब है”।

वायरल वीडियो को सोशल मीडिया पर हालिया दिनों में शेयर कर दावा किया जा रहा है कि “कन्हैया कुमार नक्सली हमले में शहीद हुए सेना के जवानों को शहीद नहीं मानते”।

फेसबुक पर वायरल वीडियो शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा कि “नक्सली हमले में शहीद हुए सेना के जवानों को शहीद नहीं कहा जाना चाहिए – कन्हैया कुमार सेना द्वारा मारे गए नक्सलियों को असली शहीद कहा जाना चाहिए – कन्हैया कुमार- कांग्रेस नेता कॉमरेड कन्हैया कुमार से लेकर कॉमरेड रवीश कुमार”

 

फैक्ट चेक:

 

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल वीडियो हालिया दिनों का नहीं बल्कि साल 2016 के दौरान का है। इसके साथ ही वायरल वीडियो में उनका अधूरा बयान वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देखने पर हमें इसके पुराने होने का शक हुआ। चूंकि पत्रकार रवीश कुमार इन दिनों NDTV के साथ नहीं है। इसलिए वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए हमने पड़ताल की। सबसे पहले हमने वायरल वीडियो को कुछ कीफ्रेम्स में तोड़ा और फिर गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च टूल के माध्यम से खोजना शुरू क्या।

खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो NDTV की वेबसाइट पर वायरल वीडियो मिला जिसे मार्च 04, 2016 को अपलोड किया गया था।

उपरोक्त प्राप्त 40 मिनट के इस वीडियो को 37 मिनट 12 सेकंड तक देखने के बाद हमें वायरल वीडियो वाला हिस्सा मिला। यहाँ हमने देखा कि एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार (जो अब NDTV के साथ नहीं है) ने तत्कालीन JNU छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार से यह सवाल पूछा था कि “देश में एक तर्क चल रहा है कि सीमा पर जवान शहीद हो रहे हैं और आप मिनिमम यूनिटी जैसी अय्याशी वाली बातें कर रहे हैं। आप पढ़िए लिखिए नौकरी करिये आप ऐसी बाते क्यों कर रहे हैं। इसके साथ ही वह कहते है कि आप के भाई भी CRPF के जवान रहे हैं जो नक्सलियों से लड़ते हुए शहीद हुए तो क्या कभी आपको लगा कि आप अपने भाई की शहादत को कमतर कर रहे हैं।”

इस पर कन्हैया ने जवाब देते हुए कहा था कि “हम किसी की शहादत को डिमीन नहीं करना चाहते हैं। हमारी लड़ाई यही है कि सारे शहीदों को शहादत का दर्जा दिया जाए और जो इनको शहीद बना रहे हैं, उनके खिलाफ जंग छेड़ी जाए। मैं कहता हूं कि जिनको नक्सली बताकर मारा जा रहा है वो भी शहीद हैं, भोले भाले आदिवासी हैं। जो तथाकथित नक्सली हिंसा में शहीद हो रहा है वो भी उनके जैसा एक गरीब का बेटा है। जो लोग इस देश में अनाज उपजा रहे हैं, वो किसान जो मर रहे हैं वो भी इस देश के शहीद हैं। और जो सीमा पर मर रहे हैं वो भी शहीद हैं। इन सारे शहीदों को एकजुट होना है। ये सारे परिवार को शहीद के परिवार का दर्जा मिलना चाहिए।

 

उपरोक्त वीडियो को पूरा देखने पर हमने पाया कि वायरल वीडियो पुराना है साथ ही आधा-अधूरा है पूरा वीडियो देखने पर हमने पाया कि वह अपने बयान में कहते हैं कि हमारी लड़ाई यही है कि सारे शहीदों को शहादत का दर्जा दिया जाए और जो इनको शहीद बना रहे हैं, उनके खिलाफ जंग छेड़ी जाए। मैं कहता हूं कि जिनको नक्सली बताकर मारा जा रहा है वो भी शहीद हैं, भोले भाले आदिवासी हैं। जो तथाकथित नक्सली हिंसा में शहीद हो रहा है वो भी उनके जैसा एक गरीब का बेटा है। जो लोग इस देश में अनाज उपजा रहे हैं, वो किसान जो मर रहे हैं वो भी इस देश के शहीद हैं। और जो सीमा पर मर रहे हैं वो भी शहीद हैं।  उनके इसी बयान को आधा- अधूरा शेयर कर सोशल मीडिया पर हालिया दिनों में भ्रम फैलाया जा रहा है।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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