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फैक्ट चेक: बुज़ुर्ग महिला को जबरदस्ती वृद्धाश्रम ले जा रहे बेटे-बहु का ये वीडियो है स्क्रिप्टेड

सोशल मीडिया पे वीडियो वायरल हो रहा है एक युवक-युवती को महिला को कहीं ले जाते हुए दिखाया जा रहा है।  इस दौरान वीडियो बना रहा शख्स उन दोनों से पूछता है कि वे महिला को कहां ले जा रहे हैं ? इसपर वो है कहते है की वह बुज़ुर्ग महिला उनकी माँ है और वो उन्हें वृद्धाश्रम ले जा रहे है। तब वीडियो बना रहा युवक वृद्ध माहिला से पूछता है की क्या वो अपनी मर्ज़ी से जा रही है जिसपर वो न करके रोने लगती है।  इससे सच्ची घटना बता तक लोग सोशल मीडिया पे इससे जम के शेयर कर रहे है।

एक फसबूक यूजर ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “सास : हमको अपने घर रहना है हमे जबरदस्ती आश्रम भेज रहे हैं । बेटा : हमारे घर का मामला है हम रोज कलेश नही बर्दास्त कर सकते है । हम पैसा दे देंगे सेवा नही करेंगे ।अब  सोचना ये है गलती किसकी  अकेली मां पिता है नही  इकलौता संतान गलती किसकी  सास की बहु की बेटे की या समाज की सरकार की हम दो हमारे दो। बुढ़ापे का आसरा रहने दो।”

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

इसे फेसबुक और ट्विटर पर काफी शेयर किया गया।

फैक्ट चेक

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल दावा झूठा है।  दरअसल वायरल हो रहा वीडियो स्क्रिप्टेड है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के साथ शेयर किए गए दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने पड़ताल की। पड़ताल के दौरान हमने वीडियो को कुछ कीफ्रेम में तोड़कर एक फ्रेम को गूगल रिवर्स सर्च टूल की सहायता से खोजना शुरू किया। इस दौरान हमे यह वीडियो एक यूट्यूब चैनल पे मिला जिसे की मई 30, 2022, को शेयर किया गया था।  इससे ये साबित होता है की वीडियो हल का नहीं है।

आगे पड़ताल के दौरान कुछ वायरल वीडियो पे हमने पाया की पोस्ट के लिखा है कि ओरिजनल वीडियो राहुल नवाब नाम के फेसबुक पेज पर है। सर्च करने पे इस फेसबुक पेज पर हमें इस वीडियो का लंबा वर्जन मिला, जो कि 5 अक्टूबर 2022 को अपलोड किया गया था। इस फेसबुक पेज के परिचय में लिखा है, “वीलॉग और एक्सपोज़ वीडियो, हेल्पिंग वीडियो आदि।

हमने पाया की वायरल वीडियो स्क्रिप्टेड है और जागरूकता और मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है। इसी पेज पे 8 अगस्त को अपलोड किए गए एक वीडियो में वही महिला देखी जा सकती हैं, जो वायरल वीडियो में हैं।

इसके अलावा हमने पाया की फेसबुक पेज पर राहुल नवाब पेट हाउस नाम के यूट्यूब चैनल का लिंक है। चैनल पर दी गई फ़ोन नंबर के जरिए हमने फेसबुक पेज चलाने वाले राहुल से संपर्क किय। उन्होंने हमसे बात चीत में बताया की वायरल वीडियो स्क्रिप्टेड है और इससे जागरूकता और मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है

हमारी पड़ताल में हमने पाया कि वायरल वीडियो कोई वास्तविक घटना नहीं है बल्कि मनोरंजन और शिक्षा के उद्देश्य से बनाया गया एक काल्पनिक वीडियो है जिसे सच्ची घटना के रूप में गलत तरीके से साझा किया गया है।

 

 

 

 

 

 

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