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फैक्ट चेक: नेशनल जियोग्राफिक कवर पर किसान की इस तस्वीर का जानें सच

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमे दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीर नेशनल जियोग्राफिक कवर की अभी की है।

फेसबुक के कैप्शन में लिखा है – दुःख के इस समय में नेशनल जियोग्राफिक मैगज़ीन पर अभी तक का सबसे अच्छा कवर। #fearlesseyes #farmers #faith

इसी तरह के अन्य पोस्ट आप यहाँ, यहाँ , यहाँ और यहाँ देख सकते है।

फैक्ट चेक :

न्यूज़ मोबाइल ने उपरोक्त पोस्ट की जांच की और पाया कि तस्वीर मॉर्फेड है यानी एडिटेड है।

सबसे पहले हमने अपनी जाँच शुरू की नेशनल जियोग्राफिक की आधिकारिक वेबसाइट से। हालाँकि, वेबसाइट को सावधानीपूर्वक स्कैन करने के बावजूद भी, हमें उपरोक्त कवर नहीं मिला।

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इसके अलावा हमने नेट जियो के जनवरी 2021 के अंक (इशू) को स्कैन किया लेकिन हमे वहां भी ये तस्वीर नहीं मिली।

इसके बाद हमने वायरल पोस्ट से किसान की तस्वीर को क्रॉप किया और इसे रिवर्स इमेज सर्च के माध्यम से चलाया। खोज करने के बाद हमे यही तस्वीर 12 दिसंबर, 2020 को आउटलुक द्वारा प्रकाशित की गई एक फोटो गैलरी में मिली।

तस्वीर के कैप्शन में लिखा था – “नई दिल्ली में नए फार्म कानूनों के खिलाफ ‘दिल्ली चलो’ विरोध में सिंघु बॉर्डर पर एक किसान”। पीटीआई फोटो / रवि चौधरी

इसके अलावा, जब हम सबूत के लिए वायरल कवर का विश्लेषण कर रहे थे,तब हमे दाएं हाथ के निचले कोने पर @anoopreet लिखा हुआ दिखा।

आगे जांच के लिए हमने फिर एक खोज की और पाया कि चित्र 3 जनवरी, 2020 को खुद अनूप्रीत द्वारा अपलोड किया गया था। अपने पोस्ट में उन्होंने साफ़ लिखा था कि यह एक ‘काल्पनिक आवरण’ है।

इसीलिए हम दावा कर सकते है कि उपरोख्त वायरल कवर भ्रामक और फेक है।

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