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पुरानी शराब नीति पर वापस लौटेगी दिल्ली सरकार, सिसोदिया ने बीजेपी पर साधा निशाना

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा चल रही जांच और दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और दिल्ली सरकार के बीच चल रही तनातनी के बीच राजधानी में शराब नीति विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है.

 

मौजूदा आबकारी नीति समाप्त होने में केवल दो दिन शेष हैं, दिल्ली सरकार ने छह महीने के लिए खुदरा शराब की बिक्री की पुरानी व्यवस्था पर वापस जाने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को इस बाबत ऐलान किया कि राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार से पुरानी आबकारी नीति वापस से लागू हो जाएगी.

 

बता दें कि आबकारी नीति 2021-22 को 31 मार्च के बाद दो बार दो-दो महीने के लिए बढ़ाया गया था, हालांकि अब 31 जुलाई को इस पर पूर्णविराम लग जाएगा. इससे पहले अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया था कि आबकारी विभाग का प्रभार संभाल रहे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को विभाग को ‘नई नीति के आने तक छह महीने के लिए आबकारी की पुरानी व्यवस्था पर ‘लौटने’ का निर्देश दिया था.

 

मनीष सिसोदिया ने कहा कि ”हम भ्रष्टाचार को रोकने के लिए नई शराब नीति लाए. इससे पहले सरकार को 850 शराब की दुकानों से करीब 6,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था. लेकिन नई नीति के बाद, हमारी सरकार को इतनी ही दुकानों से 9,000 करोड़ रुपये से अधिक मिले.”

 

मनीष सिसोदिया ने बीजेपी को निशाना बनाते हुए कहा कि आज दो राज्यों की शराब नीति के तथ्य रखूंगा. गुजरात में खुलेआम शराब बिकती है और इनके (बीजेपी) लोग ही शराब बनाते और बेचते हैं. जहरीली शराब पीकर लोगों की जान जा रही है. यह मॉडल गुजरात में लागू किया है.

 

उन्होंने कहा कि दिल्ली में 2021-22 की शराब नीति लाई गई. इससे पहले बहुत भ्रष्टाचार होता था, प्राइवेट दुकानें इन्होंने यार-दोस्तों को दी हुई थीं और लाइसेंस फीस नहीं बढ़ाई थी. पहले दिल्ली में 850 दुकानें थीं, जिससे 6000 करोड़ का रेवेन्यू मिलता था.

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