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नीतीश Vs तेजस्वी: बिहार विधानसभा के दौरान सदन में आग बबूला हुए सीएम नितीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने की थी ये तल्ख़ टिप्पणी

विधानसभा से 5 दिनों के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी को अपना रौद्र रुप दिखा दिया। दरअसल बिहार विधान सभा में बीते दिन सदन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर डाली और बस देखते ही देखते सदन में जबरदस्त हंगामा मच गया। मामला इतना बढ़ गया कि इस भारी शोर-शराबे के बीच डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने विरोधी दल के नेता के बयान को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि सदन के भीतर ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। उन्होंने ये तक कहा कि तेजस्वी को मर्यादा का पालन करना चाहिए। मुख्यमंत्री पर ऐसी टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। ये गलत परंपरा की शुरुआत है।

कैसे शुरू हुए शब्दों के तीखे बाण।

मामला तब का है जब बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान CM नितीश कुमार ने कथित रूप से महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उमीदवार यानी तेजस्वी यादव पर तंज कस दिया। दरअसल उन्होंने उस वक़्त के चुनावी सभा में कहा था कि लोगों ने बेटे की चाह में 9 बच्चे पैदा किये।

जिसके बाद उस वक़्त तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को जवाब देते हुए कहा था कि नीतीश जी दरअसल हमारे बहाने सीधे पीएम मोदी पर ही निशाना बना रहे हैं। पीएम जी भी 6-7 भाई बहन हैं।

सदन में भी दिखी वही तल्खी।

बिहार चुनाव प्रचार के दौरान की तल्खी तेजस्वी यादव ने सदन में भी जारी रखी और उन्होंने सीएम नीतीश कुमार पर सदन में व्यक्तिगत टिपण्णी कर दी। उन्होंने कहा, नीतीश अपनी चुनावी सभाओं में लालू को 9 बच्चों की बात करते थे। कहते थे बेटी पर भरोसा नहीं था, बेटे के लिए 9 बच्चे हुए. क्या नीतीश कुमार को लड़की पैदा होने का डर था, इसलिए उन्‍होंने दूसरा बच्चा नहीं पैदा किया?

फिर नितीश ने दी सफाई।

इस टिप्पणी के बाद बेटे की चाह में बेटियां पैदा करते रहे बयान पर नीतीश कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि वो तो हमने मजाक में कह दिया। हम प्रजनन दर की बात करते रहे, उसी में मजाक में कोई बात कह दिए। लोग तो खुद ही अपने बारे में सोचते हैं। मतलब एक बात तो समझ लिए कि लोगों को बातें लगती हैं। इसके अलावा उन्‍होंने कहा कि तेजस्वी ने जो बातें कहीं वैसी बात नहीं करनी चाहिए। सदन में हल्की बात नहीं होनी चाहिए।

हत्या के मामले के आरोपों को भी तेजस्वी ने दिलाया याद।

इतना ही नहीं सदन में तेजस्वी ने सीएम पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह 1991 में हुई एक हत्या के मामले में शामिल हैं। साथ ही तेजस्वी ने नीतीश के ऊपर कंटेंट चोरी के मामले में उन पर लगे 25 हजार रुपये जुर्माने का भी जिक्र करते उन्हें घेरा था। बस तेजस्वी ने ये आरोप लगाए और फिर सीएम ने तेजस्वी यादव को जमकर खरी-खोटी सुनाई।

वहीं, विधानसभा की कार्यवाही के बाद मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री तक मेरे जैसे 31 साल के लड़के के पीछे लगे रहे। मेरा क्या-क्या नाम दिया. जनता ने हमें जनादेश दिया है और ये सरकार चोर दरवाजे से आई है।

तेजस्वी यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि 1991 में केस हुआ, 2008 में फैसला आना था, लेकिन टल गया. 2019-20 में कैसे केस खत्म हो गया, ये सब जानते हैं। मुख्यमंत्री (नीतीश कुमार) रहते हुए क्या एसपी उनके खिलाफ काम करेगा? आप इस्तीफा दे देते, फिर जांच कराते।

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