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दशहरा 2020 : इस दशहरा जानें उन जगहों के बारे में जहां होती है “रावण” की पूजा

दशहरा या विजयादशमी, एक ऐसा दिन जब रावण के पुतले को जलाया जाता है और उसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। दशकों से दशहरा का पर्व हिंदू धर्म में इसी तरह मनाया जाता रहा है। माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय पाई थी और अपनी पत्नी यानि देवी सीता को उसकी कैद से वापस ले आए थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में ही कई ऐसी जगह हैं जहां पर रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता बल्कि रावण को पूजा जाता है ।

आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में जहां रावण की पूरे आदर-भाव से होती है पूजा –

कानपुर, उत्तर प्रदेश

उत्तरप्रदेश के कानपुर में यह मंदिर लगभग 120 साल पुराना माना जाता है। दशहरे पर हर साल इस मंदिर में 1 किलोमीटर तक लम्बी कतार दर्शन मात्र के लिए लगती है। और तो और मंदिर के द्वार भी साल में केवल एक दिन यानी आज के दिन खोले जाते है। अगर दशहरे के दिन आप यहाँ जाएंगे तो आपको “रावण बाबा नमः” के मंत्रो को आराम से सुन पाएंगे।

कांगड़ा, हिमाचलप्रदेश

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक गांव है वहां भी रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता बल्कि पूजा की जाती है। इसके पीछे मान्यता यह है कि यहां रावण ने भगवान शिव की तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर शिव ने रावण को मोक्ष का वरदान दिया था।

बिसरख, उत्तरप्रदेश

उत्तर प्रदेश का एक जिला है गौतमबुद्ध नगर। यहां के बिसरख गांव में एक रावण का मंदिर है। ये गांव गाजियाबाद से महज 15 किलोमीटर दूर है और माना जाता है कि ये रावण का ननिहाल था। पहले इस गांव का नाम विश्वेश्वरा था जोकि रावण के पिता विश्रवा के नाम पर पड़ा, लेकिन अब इसे बिसरख के नाम से जाना जाता है।

मंडोर, राजस्थान

जोधपुर शहर के निकट स्तिथ है मंडोर, जहां के निवासी मुख्य रूप से मौदगिल और दवे ब्राह्मण हैं। ख़ास बात ये है कि यहाँ के लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं। इन लोगों का मानना है कि ये वही जगह है जहां राजकुमारी मंदोदरी के साथ रावण का विवाह हुआ था। और तो और इसी चीज़ के लिए वहां पर एक मंदिर भी है जो उनके विवाह का साक्षी है।

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उज्जैन,मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश के ही उज्जैन में एक गांव है चिखली। वहां भी रावण को पूरे आदर-भाव के साथ पूजा जाता है। यहां के लोग मानते हैं कि अगर रावण को पूजा नहीं गया तो पूरा गांव जलकर राख हो जाएगा। इसीलिए यहां के लोग रावण के पुतले को जलाने के बजाय उसकी पूजा करते हैं ताकि गांव सुरक्षित रहे। इतना ही नहीं इस गांव में रावण की एक मूर्ति भी है।

मंदसौर, म.प्र

राजस्थान-एमपी बॉर्डर के पास इंदौर शहर से लगभग 200 किमी दूर स्थित है मंदसौर शहरजो अपने ऐतिहासिक और धार्मिक कारणों के चलते प्रतिष्ठित है। यह एक ऐसा स्थान है जहां रावण की 10 मुंडी वाली 35 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर में पूरे क्षेत्र से रावण के प्रशंसक आते हैं। इसके समीप शाजापुर जिले में भदकेदी गाँव स्थित है, जहाँ रावण के पुत्र मेघनाद को समर्पित एक और मंदिर स्थित है।

काकीनाडा, आंध्र पद्रेश

आंध्र पद्रेश के काकीनाडा में एक ऐसा मंदिर है जहां रावण और भगवान शिव दोनों की ही पूजा की जाती है। काकीनाडा रावण मंदिर में रावण की मूर्ति के अलावा शिवलिंग भी है और लोग पूरे श्रद्धा भाव से वहां पूजन करते हैं।

अमरावती, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र का अमरावती इलाका भी एक ऐसी जगह है जहां रावण को जलाया नहीं जाता बल्कि पूजा जाता है। यहां का आदिवासी समुदाय गढ़चिरौली नाम की एक जगह पर रावण का पूजन करता है क्योंकि ये समुदाय रावण को अपना देवता मानता है।

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