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प्रियंका शर्मा की रिहाई में देरी के कारण पश्चिम बंगाल सरकार पर SC का शिकंजा

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भाजपा युवा मोर्चा की संयोजक प्रियंका शर्मा की रिहाई में देरी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई. प्रियंका शर्मा को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक मॉर्फेड तस्वीर को साझा करने के लिए गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिहाई का आदेश दिया था.

शीर्ष अदालत ने कहा,”गिरफ्तारी मनमानी थी”, इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर उन्हें रिहा नहीं किया जाता तो अवमानना ​​नोटिस जारी किया जाता.

जब शर्मा के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें आज सुबह 9.40 बजे रिहा किया गया, तो अदालत ने कहा,“सुबह 9:40 क्यों? आपकी उपस्थिति में आदेश पारित किया गया था?”

शर्मा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा,” सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्काल रिहाई का आदेश देने के बावजूद, उन्हें लगभग 24 घंटे तक जेल में रखा गया और उन्हें अपमानित किया गया. उन्हें रिहाई से पहले माफीनामे पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था. हमें बताया गया था कि इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है. अगर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी तो माफी की जरूरत कहां है?”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जुलाई में माफी मांगने के मुद्दे को उठाएगा.

शीर्ष अदालत ने मंगलवार को भाजपा कार्यकर्ता शर्मा को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लिखित में माफ़ी मांगने की अपनी पूर्व शर्त को हटाते हुए जमानत दे दी थी.

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बंगाल के हावड़ा में भारतीय जनता युवा मोर्चा की सदस्य प्रियंका ने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रियंका चोपड़ा के मेट गाला लुक पर बनर्जी के चेहरे की तस्वीर को चस्पा कर उसका मीम शेयर किया था. उन्हें शुक्रवार (10 मई) को गिरफ्तार किया गया और 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया.