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न्यूज़मोबाइल एक्सक्लूसिव : पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से ख़ास बातचीत

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कोरोना से जंग के बीच भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने न्यूजमोबाइल के एडिटर इन चीफ सौरभ शुक्ला से ख़ास बातचीत की।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जब कोरोना से जंग को लेकर मंत्रालय द्वारा की गयी तैयारियों पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये ऐसा समय है जब ना केवल जनता इस समय सोशली और इकोनोमिकली प्रभवित है बल्कि साईंकोलॉजिकली भी ग्रस्त है। उन्होंने आगे कहा कि लॉकडाउन को लगाने और हटाने से ज्यादा  चुनौतीपूर्ण काम है, आर्थिक गतिविधियों को भी चलाते रहना है। जहाँ सारी  इंडस्ट्रीज इस समय प्रभावित हुई है वही पेट्रोलियम इंडस्ट्री भी इससे नहीं चुकी है। लॉकडाउन में पेट्रोलियम उत्पादों कि डिमांड 70% तक घट गयी थी जो धीरे धीर अब बढ़ रही है। पेट्रोल डीज़ल कि शुन्य डिमांड के बीच हमे लगातार LPG कि सप्लाई करनी थी। जब प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद ग्रहण किया था तो LPG पेनट्रैशन हमारे देश में केवल 55 % था जो अब बढ़ कर 95 % हो गया है।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से भी भारत कि 88 % से ज़्यादा महिलाएं लाभान्वित हुई है। रोज़ हम 50 से 60 लाख लोगों के घरों तक LPG सिलेंडरो को पंहुचा रहे है। हमे ऱिफ़यनरि, क्रूड आयात और सप्लाई चैन सभी को बनाये रखना होता है। ट्रांसपोर्टेशन फ्यूल को भी देश के सभी हिस्सों में पहुंचना होता है। जो एविएशन इमरजेंसी में है यहाँ तक कि उनकी ज़रूरतों को भी समय समय पर पहुंचना होता है। इन लिहाज़ों से पिछले 3 महीने काफी मुश्किल भरे रहे।

प्रश्न : एनर्जी डिप्लोमेसी को लेकर आपने बहुत सारे काम किये है, मगर पेट्रोलियम इंडस्ट्री और मंत्रालय इस कठिन समय में कैसे देश दुनिया के लिए मददगार और अपने ही नियति में कारगार रहा ?

ऊर्जा उपभोक्ता में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है।  इस कठिन समय में ना केवल भारत बल्कि हमने हमारे सहियोगी देश जैसे नेपाल,भूटान, म्यांमार,बांग्लादेश,श्रीलंका सभी कि ज़रूरतों को पूरा किया। अब भारत को रिन्यूएबल एनर्जी हब बनाने के लिए अग्रसर होते हुए हम LNG को ट्रांपोर्टशन फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल करेंगे।  रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत में दीर्घकालिक एलएनजी की आपूर्ति शुरू करने वाला नवीनतम देश है। LNG मार्किट में आसानी से उपलभ्ध है और इसी अवसर को हम इस्तेमाल करेंगे क्योंकि LNG ना केवल कम हानिकारक है बल्कि आसानी से उपलब्ध भी है। आज भारत एनर्जी और पेट्रोलियम के मामले में ना केवल डेवलप्ड नेशंस बल्कि डेवलपिंग नेशंस के लिए भी मददगार साबित हुआ है।

प्रश्न : क्या भारत द्वारा नेपाल को एनर्जी और पेट्रोलियम क्षेत्रों में मदद, हमारे बीच हुए राजनितिक मसलों को हल कराने में मदद करेगी ?

भारत एक मददगार देश है और राजनितिक मतभेदों से दूर हम नेपाल को ऊर्जा प्रदान करते रहेंगे क्योंंकि ऐसी ना  भारत कि मानसिकता है और ना ही व्यवहार।

प्रश्न : भारत और अमेरिका ने इन दिनों एनर्जी पार्टनरशिप पर जमकर काम कर रहा है, वो सम्बन्ध आपको कैसे उभरते नज़र रहे है ?

जब अमेरिका  ने एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन में कदम रखा था तो भारत ही वो पहला देश था जो अमेरिका के प्रत्योगी कीमतों को मंज़ूर करते हुए मार्किट में उतरा था। अमेरिका के द्वारा कदमों का हम स्वागत करते है और हर वो कदम उठाया जायेगा जिससे भारत अमेरिका कि दोस्ती गहरी हो और भारत और यहाँ के नागरिक इसका पूरा फायदा उठाये।

प्रश्न :  हाल फिलहाल में ही मोदी सरकार ने एनर्जी जस्टिस कि संकल्पना की, उसपर ज़मीनी हकीकत क्या है?

 प्रधानमंत्री द्वारा एनर्जी जस्टिस जैसे नए कदम का आह्वाहन किया गया। इसका मतलब है हम देश के सभी नागरिक को एनर्जी जस्टिस देंगे। हमे इसमें अफ्फोर्डबिलिटी, स्थिरता, उसकी पहुंच, दक्षता और  सिक्योरिटी पर काम करना है, यानी एनर्जी सब तक पहुंचे, सही कीमत में पहुंचे ताकि लोग उसका इस्तेमाल कर पाए और उसकी क्षमता और दक्षता के साथ साथ उसका सही और सुचारु रूप से इस्तेमाल भी हमारी प्राथमिकता है। एनर्जी कि सामर्थ्ययता , स्थिरता, उसकी पहुंच, दक्षता और  सिक्योरिटी से भारत के लोगों को ना केवल सोशल इकनोमिक जस्टिस मिलेगा मगर भारत कई पैमानो पर निरंतर आगे भी बढ़ेगा।  एनर्जी एक कैटेलिस्ट होना चाहिए और हमे इस कदम में तत्पर आगे बढ़ रहे है।

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प्रश्न :  कोरोना संकट में ये कैसे सुनिश्चित किया जाए कि इस कठिन समय में लोगों को पेट्रोल डीज़ल कि कम से कम कीमत चुकानी पड़े?

आयत के मामले में भारत को विश्व में तीसरा स्थान प्राप्त है।  इसीलिए हम ज़्यादा निर्यात करने वाले देशों से लगातार संपर्क में है ,और वैसे भी भारत के बाजार को देखते हुए हम एक सकारात्मक समझौते की उपेक्षा कर सकते है। हमारे पास एक सोर्स ऑफ़ एनर्जी नहीं बल्कि अनेकों है। हम कोयले से गैस बनाएंगे, हम थर्मल पावर में कोयले को इस्तेमाल करेंगे, कच्चा तेल, LNG ,घरेलू गैस, बायों एनर्जी, सोलर पावर, विंड पावर , जैसे अन्य कई सोर्स में हम है। हम बहु मंद काम करेंगे ताकि उत्पादन वाले देश, हमारे साथ मोनोपोली वाला व्यवहार नहीं करे। भारत अपने  400 जिलों में गैस बेस्ड आधारिक संरचना भी तैयार कर रहा है।  हम आधारिक संरचना पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे है जिससे विश्व के मार्केट भारत में निवेश करे और अंततः इससे भारत के नागरिकों को पुर ज़ोर फायदा मिले।

प्रश्न :  कोरोना  से हुए आर्थिक नुक्सान के बाद लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए मंत्रालय ने क्या रूप रेखा तैयार कि है?

कोरोना से हुए आर्थिक नुक्सान से बचने के लिए हम आत्म निर्भर भारत अभियान के अंतर्गत रोडमैप तैयार कर रहे है।  भारत सरकार के अंतर्गत आने वाली सभी कम्पनियाँ भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में 1 लाख करोड़ से ज़्यादा  निवेश करेंगी, इंफ्रास्ट्रक्चर से मजदूरों के लिए रोज़गार के साधन निकलेंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर से ही हम देश में बड़ा निवेश ला पाएंगे।